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Vat Savitri Vrat 2026: इस दिन पति-पत्नी मिलकर करें बरगद की पूजा, रिश्ते में बढ़ेगा प्रेम और अटूट होगा बंधन

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत को हिंदू धर्म के प्रमुख और महानतम व्रतों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि यह व्रत करने अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और सुख-समृद्धि आती है। इस दिन पति-पत्नी के मिल कर बरगद की पूजा करने से रिश्ते में प्रेम बढ़ता है और बंधन अटूट बनता है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 07, 2026 पर 12:40 PM
Vat Savitri Vrat 2026: इस दिन पति-पत्नी मिलकर करें बरगद की पूजा, रिश्ते में बढ़ेगा प्रेम और अटूट होगा बंधन
पति-पत्नी को मिलकर बरगद के पेड़ की पूजा और 11 या फिर 108 बार परिक्रमा करनी चाहिए।

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या और पूर्णिमा तिथि को देश के अलग-अलग हिस्सों में किया जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष स्थान रखता है। माना जाता कि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है और सुख-समृद्धि आती है। इस व्रत को अटूट प्रेम और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पति-पत्नि अगर मिल कर बरगद के पेड़ की पूजा करते हैं, तो उनका बंधन अटूट बनता है और रिश्ते में प्रेम बढ़ता है। इस साल इस व्रत के साथ कुछ दुर्लभ संयोग जुड़ रहे हैं। इनमें से एक तो यह है कि इस साल वट सावित्री व्रत के साथ शनिश्चरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन सौभाग्य योग और शोभन योग में पूजा का संयोग भी है।

कब किया जाएगा वट सावित्री का व्रत?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि का आरंभ 16 मई 2026 को सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा। अमावस्या तिथि का समापन 16 मई को ही देर रात 1 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में इस साल वट सावित्री का व्रत 16 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा।

वट सावित्री व्रत पूजा मुहूर्त

पंचांग के अनुसार इस दिन प्रात:काल 10:26 बजे तक सौभाग्य योग रहेगा और उसके बाद शोभन योग प्रारंभ हो जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में दोनों योगों को अत्यंत ही शुभ माना जाता है। इसलिए, इन योगों में वट सावित्री की पूजा अत्यंत ही पुण्यदायी और फलदायी रहेगी।

पति-पत्नी साथ में करें बरगद की पूजा

वट सावित्री व्रत के दिन पति-पत्नी को मिलकर बरगद के पेड़ की पूजा और 11 या फिर 108 बार परिक्रमा करनी चाहिए। वृक्ष की पूजा में सूती वस्त्र, 5 तरह के ऋतु फल, अक्षत, जनेऊ, चंदन, पान-सुपारी आदि अर्पित करें और घी का दीपक जलाएं। माता सावित्री को शृंगार का सामान जैसे सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी, चूड़ियां और बिंदी आदि चढ़ाएं। परिक्रमा के समय इस मंत्र का जप करें - यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सर्वानि वीनश्यन्ति प्रदक्षिण पदे पदे।।

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