Pradosh Vrat 2026: नए साल में प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग, एक माह में तीन और साल के पहले दिन प्रदोष व्रत

Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत प्रत्येक हिंदू माह में त्रयोदशी तिथि को किया जाता है, जो दो बाद आती है। नए साल में प्रदोष व्रत का बहुत दुर्लभ संयोग बन रहा है। नए साल की शुरुआत प्रदोष व्रत से हो रही है और पहले माह में तीन प्रदोष आएंगे। आइए जानें इसके बारे में

अपडेटेड Dec 30, 2025 पर 10:52 PM
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नए साल के पहले दिन यानी 01 जनवरी 2026 को पौष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पड़ रही है।

Pradosh Vrat 2026: नया साल 2026 प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। ये प्रत्येक हिंदू माह में दो बार किया जाता है। एक बार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को और एक बार शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को। इस तरह साल में 24 प्रदोष व्रत किए जाते हैं। इस व्रत में प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने का विधान है। नए साल के पहले दिन यानी 01 जनवरी 2026 को पौष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पड़ रही है। इस दिन गुरुवार होने से ये गुरु प्रदोष व्रत होगा। इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा का अद्भुत संयोग बन रहा है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है, वहीं प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस तरह नए साल के पहले दिन हरि हर की पूजा का सुनहरा अवसर बन रहा है। इतना ही नहीं साल के पहले महीने में तीन प्रदोष व्रत किए जाएंगे। आइए जानें इसके बारे में

जनवरी 2026 में प्रदोष व्रत

साल 2026 की जनवरी में पहला प्रदोष व्रत 1 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। यह पौष माह के शुक्ल पक्ष का होगा। वहीं, दूसरा प्रदोष व्रत 16 जनवरी को रखा जाएगा, जो माघ माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत होगा। इस माह का तीसरा प्रदोष व्रत 30 जनवरी को रखा जाएगा। यह शुक्र प्रदोष व्रत होगा। जो माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को पड़ेगा।

पहले प्रदोष व्रत की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार 1 जनवरी 2026 को त्रयोदशी तिथि सुबह लगभग 1 बजकर 47 मिनट से शुरू होकर रात लगभग 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगी। इस दिन प्रदोष काल शाम लगभग 5 बजकर 35 मिनट से रात 8 बजकर 19 मिनट तक होगा, जो पूजा-अर्चना के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास का वह विशेष समय होता है, जो भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे अधिक शुभ होता है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि


इस दिन व्रत रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और संकल्प लें। शाम को पूजा स्थल पर शिव-पार्वती की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें। अभिषेक के लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का पंचामृत तैयार करें तथा शिवलिंग पर अर्पित करें। बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, सफेद फूल और कनेर के फूल चढ़ाएं, क्योंकि ये महादेव को अत्यंत प्रिय हैं। इस दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जाप करें और शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। दीपक जलाकर आरती उतारें तथा पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा मांगें। व्रत पूरा होने पर फलाहार या प्रसाद ग्रहण करें।

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