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Pradosh Vrat 2026: भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ शुरू होगा नया साल, पहले दिन प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग

Pradosh Vrat 2026: नए साल 2026 की शुरुआत दुर्लभ संयोग के साथ हो रही है। साल के पहले दिन प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बनने से इसका धार्मिक महत्व बढ़ गया है। 01 जनवरी को पौष शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि होगी। आइए जानें पौष माह के अंतिम प्रदोष व्रत पर पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि क्या रहेगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 26, 2025 पर 9:48 PM
Pradosh Vrat 2026: भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ शुरू होगा नया साल, पहले दिन प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग
पौष माह का दूसरा और अंतिम प्रदोष व्रत 01 जनवरी 2026 को किया जाएगा।

Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष की तिथि को भगवान शिव और माता पर्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पर्वती की पूजा करने कष्टों से मुक्ति मिलती है और पुण्य फल प्राप्ति होती है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत प्रत्येक हिंदू माह में दो बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस तरह साल में 24 प्रदोष व्रत होता है। पौष माह का दूसरा और अंतिम प्रदोष व्रत 01 जनवरी 2026 को किया जाएगा। नए साल की शुरुआत भगवान शिव के आशीर्वाद के साथ होने की वजह इस दिन का धार्मिक महत्व बढ़ गया है। आइए जानें इस दिन की पूजा विधि और मुहूर्त क्या रहेंगे ?

प्रदोष व्रत कब है?

पंचांग के मुताबिक, पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 31 दिसंबर को देर रात 01 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 1 जनवरी 2026 को देर रात 10 बजकर 22 मिनट पर होगा। पौष माह का अंतिम लेकिन साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत 1 जनवरी को होगा।

प्रदोष व्रत पूजा विधि

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को 11 बेलपत्र अर्पित करें, चंदन लगाएं और एक शमी का फूल अर्पित करें। दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना करें और शिव परिवार की पूजा करें। पूरे साल महादेव की कृपा प्राप्त बनी रहेगी।

साल के पहले प्रदोष व्रत पर महादेव को शहद, घी और दही चढ़ाएं, ऊँ नम: शिवाय।। मंत्र का जाप करें। इससे आपके अटके काम पूरे और जीवन में एक नई शुरुआत करने में कामयाबी मिल सकती हैं।

प्रदोष व्रत के दिन सुबह शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाएं। इस दौरान शिव जी की आरती भी करें और फिर ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।। मंत्र का उच्चारण करें। इसके प्रभाव से मन से सभी तरह के डर भय की समाप्ति होती हैं।

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