Purushottam Maas 2026 Pradosh Vrat: प्रदोष व्रत प्रत्येक हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। किसी माह में जब अधिक मास लगता है, तो उस माह में प्रदोष व्रत संयोग भी बनता है। यानी एक माह, जो दो माह के बराबर हो जाता है, उसमें 4 प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग प्राप्त होता है। अधिक मास के अतिरिक्त प्रदोष व्रत तीन साल में एक बार मिलने वाला अवसर है। इसे भगवान शिव और शनि देव की कृपा पाने का पवित्र और प्रमुख अवसर माना जाता है।
इस साल अधिक मास का दुर्लभ संयोग ज्येष्ठ माह में बना है। ज्येष्ठ अधिक मास की शुरुआत 17 मई से हो चुकी है और यह 15 जून 2026 को समाप्त होगा। माना जाता है कि इस दौरान आने वाले 2 प्रदोष व्रत सभी प्रकार के चंद्र दोष, शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कुंडली के अन्य दोषों से मुक्ति दिलाते हैं। आइए जानें ज्येष्ठ अधिक मास में दो प्रदोष व्रत कब-कब किए जाएंगे ? इस दौरान शनि और चंद्र दोष ये मुक्ति के लिए क्या उपाय कर सकते हैं?
पहला प्रदोष : 28 मई 2026 गुरुवार को गुरु प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।
दूसरा प्रदोष : 11 जून 2026 शुक्रवार को शुक्र प्रदोष का व्रत रखा जाएगा।
शिव-शनि का संबंध : प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है, जो शनिदेव के गुरु हैं। इसलिए प्रदोष काल में शिव आराधना करने से शनिदेव शांत होते हैं।
चंद्र और शनि दोषों का अंत : कुंडली में कमजोर चंद्रमा (मानसिक तनाव) और शनि के कुप्रभाव (काम में रुकावट, आर्थिक तंगी) से मुक्ति के लिए यह सबसे उत्तम समय है।
महामृत्युंजय मंत्र : इस संयोग में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से शनि जनित सभी कष्ट समाप्त होते हैं।
काले तिल और सरसों का तेल : प्रदोष के दिन शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाएं और शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
शनि चालीसा का पाठ : शाम के समय शनि चालीसा या हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।
सफेद वस्तुओं का दान : इस दिन किसी जरूरतमंद को चावल, चीनी या सफेद कपड़े का दान करें।
दूध और जल का अर्घ्य : प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) शिवलिंग पर कच्चे दूध में गंगाजल मिलाकर अर्पित करें।
मंत्र जाप : 'ॐ नमः शिवाय' या 'ॐ सोम सोमाय नमः' मंत्र का जाप करें।