Raj Panchak 2026: अप्रैल में इस तारीख से लगने जा रहा है राज पंचक, जानें पंचक के नियम और कब होता है राज पंचक

Raj Panchak 2026: हिंदू धर्म में पंचक को अशुभ समय माना जाता है। पांच दिनों की इस अवधि में कई बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। अप्रैल में भी पंचक लगने जा रहा है, जो राज पंचक होगा। आइए जानें क्या होता है राज पंचक और इसके किन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है

अपडेटेड Apr 10, 2026 पर 5:53 PM
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राज पंचक 2026 एक दुर्लभ और शुभ संयोग है।

Raj Panchak 2026: हिंदू धर्म में शुभ-अशुभ कार्यों में तिथि और मुहूर्त का विचार किया जाता है। दिन का कोई विशेष समय या कुछ दिनों की अवधि को अशुभ माना जाता हैं। पंचक की गिनती भी ऐसी अवधि में होती है। लेकिन पांच दिनों तक चलने वाला पंचक 5 तरह का होता है। इसका प्रकार इसके शुरू होने वाले दिन से तय होता है। खास बात ये है कि हर पंचक बुरा नहीं होता है। राज पंचक 2026 एक दुर्लभ और शुभ संयोग है। इसे सही तरीके से उपयोग करके आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता को आमंत्रित कर सकते हैं।

चंद्रमा जब कुंभ या मीन राशि में होता है तब पंचक लगता है। पांच दिनों की अवधि के दौरान चंद्रामा पांच नक्षत्रों, धनिष्ठा नक्षत्र, शतभिषा नक्षत्र, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और रेवती नक्षत्र से होकर गुजरता है। चंद्रमा जब इन राशि-नक्षत्रों के संयोग में गोचर करता है, तब पंचक लगता है। शास्त्रों में पांच प्रकार के पंचक बताए गए हैं - रोग पंचक, अग्नि पंचक, मृत्यु पंचक, चोर पंचक और राज पंचक। लेकिन हर पंचक खराब नहीं होता है। इनमें पांचों में राज पंचक को अच्छा माना जाता है।

13 अप्रैल से पांच दिन रहेगा पंचक

पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल 2026, सोमवार को धनिष्ठा नक्षत्र लग रहा है। 13 अप्रैल, को प्रात: 03:44 बजे से पंचक लगेगा। इस दिन दोपहर 04:04 तक धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद शतभिषा नक्षत्र प्रभावी हो जाएगा। इसी दिन पंचक लगेगा। पंचक 17 अप्रैल दोपहर 12:02 तक प्रभावी रहेगा। यह पंचक सोमवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे राज पंचक कहा जा रहा है।

क्या है राज पंचक?

राज पंचक सोमवार से शुरू होता है। शास्त्रों में बताए गए पांच प्रकार के पंचक में केवल इसे ही शुभ माना जाता है। इस अवधि में किए गए शुभ कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है। राज पंचक के दौरान भक्ति, दान और नया कार्य शुरू करना फलदायी होता है।


पंचक कोई भी हो, इन नियमों की अनदेखी न करें

पंचक में न करें अंतिम संस्कार : पंचक में अंतिम संस्कार वर्जित माना जाता है। यदि जरूरी हो, तो कुश के पांच पुतले बनाकर विधि-विधान से दाह संस्कार करें।

दक्षिण दिशा की यात्रा से बचें : पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करना वर्जित माना गया है। इस समय यात्रा में बाधाएं, देरी या दुर्घटना का खतरा रहता है। यात्रा करना जरूरी हो तो पहले हनुमान जी की पूजा करें।

घर की छत नहीं डालें : पंचक में घर की छत डालना या कोई नया निर्माण कार्य शुरू करना अशुभ फल देता है। इससे धन हानि, परिवार में क्लेश या निर्माण में बाधाएं आ सकती हैं।

पलंग या चारपाई बनाना : पंचक काल में पलंग, चारपाई या किसी भी प्रकार की शय्या का निर्माण नहीं करना चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों पर संकट आने की आशंका रहती है।

लकड़ी या ईंधन का संग्रह : पंचक काल में लकड़ी, ईंधन या किसी भी ज्वलनशील चीजों को आगे के इस्तेमाल के लिए जमा करना अशुभ माना जाता है। इससे अग्नि भय या अप्रत्याशित आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। राज पंचक में भी इस नियम का पालन करें।

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