Saphala Ekadashi 2025: दिसंबर में इस दिन किया जाएगा सफला एकादशी का व्रत, जानें तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Saphala Ekadashi 2025: सफला एकादशी का व्रत पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत में पूजा और दान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि भगवान विष्णु ये व्रत करने वाले अपने भक्तों को हर काम में सफल हरने का आशीर्वाद देते हैं।

अपडेटेड Dec 08, 2025 पर 2:21 PM
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सफला एकादशी व्रत को विधिपूर्वक करने से इंसान को सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

Saphala Ekadashi 2025: सफला एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पौष के अत्यंत पवित्र मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन बहुत से लोग व्रत करते हैं और माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस दिन जरूरतमंदों को दान देने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं। भगवान कृष्ण के अनुसार, जो कोई भी एकादशी का नियमित पालन करता है, वह उन्हें प्रिय हो जाता है।

हिंदू कैलेंडर में पूरे साल में 24 एकादशी तिथियां आती हैं, यानी हर हिंदू माह में दो एकादशी। एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। सभी एकादशी तिथियों पर भगवान श्री हरि विष्णु की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी तिथि पर सच्चे मन से श्रीहरि और मां लक्ष्मी की उपासना और अन्न-धन का दान करने से इंसान को जीवन में अन्न और धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है। माना जाता है कि सफला एकादशी व्रत को विधिपूर्वक करने से इंसान को सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

सफला एकादशी व्रत की तारीख

पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 दिसंबर को शाम 6 बजकर 49 मिनट से शुरू होगी। तिथि का समापन अगले दिन 15 दिसंबर को रात 9 बजकर 19 मिनट पर है। उदया तिथि के अनुसार, सफला एकादशी का व्रत 15 दिसंबर 2025 को मान्य होगा।

सफला एकादशी पूजा मुहूर्त

पंचांग के मुताबिक, सफला एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:17 से 06:12 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:56 से लेकर दोपहर 12:37 मिनट तक मान्य है। इस तिथि पर चित्रा नक्षत्र बन रहा है, जिस पर शोभन योग का संयोग बना रहेगा।


एकादशी पूजा विधि

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, एकादशी के दिन एक साफ चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं। इस पर विष्णु की मूर्ति स्थापित करें और उन्हें वस्त्र पहनाएं। भगवान का श्रृंगार करें, विष्णु जी को माला पहनाएं। मान्यता है कि, इस दौरान चंदन का तिलक लगाकर 'ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात:' मंत्र का जाप करना चाहिए। यह बेहद शुभ होता है। शुद्ध घी से दीपक जलाएं। प्रभु को बेसन के लड्डू, केले, पंजीरी और पंचामृत आदि का भोग लगाएं। इस दिन सफला एकादशी की कथा जरूर पढ़नी चाहिए। फिर आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें। जरूरतमंदों में अन्न का दान करें। इस दौरान कुछ पैसे देना लाभकारी रहेगा।

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