Saphala Ekadashi 2025 Vrat Katha: आज पौष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। आज के दिन पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन के हर काम में सफलता प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन व्रत और दान से एक हजार अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। सफला एकादशी के दिन राजा महिष्मान और उनके पुत्र लुंपक की कथा सुनने या कहने का भी बहुत महत्व है। इस कथा में एकादशी व्रत का पुण्य प्रभाव बताया गया है। आइए जानें इस कथा का महत्व और कथा
सफला एकादशी का व्रत रखने से पिछले सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही जीवन के हर कष्ट और संकट से मुक्ति मिलती है और अंत में मोक्ष मिलता है। साथ ही श्री हरि की कृपा मिलती है।
चंपावती नाम की एक नगरी थी, जिस पर महिष्मान नामक एक राजा राज्य करता था। राजा के पांच पुत्र थे, जिनमें से सबसे बड़ा पुत्र लुंपक बेहद दुष्ट, पापी और बुरे कर्म करने वाला था। वह हमेशा देवताओं और ब्राह्मणों की निंदा करता था। अपने पुत्र के ऐसे कर्मों को देखकर राजा ने लुंपक को राज्य से बाहर निकाल दिया। लुंपक बहुत दिनों तक जंगल में दर-दर भटकता रहा। उसने खाने के लिए चोरी करना शुरू कर दिया। एक बार पौष महीने की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि की रात उसे ठंडी के कारण नींद नहीं आई। वह पूरी रात जागता रहा। अगली सुबह तक वह भूख और ठंड से बेहोश हो चुका था।
लुंपक ने तुरंत अपने पिता के पास जाकर क्षमा मांगी और उन्हें सारी बात बताई। राजा महिष्मान ने प्रसन्न होकर लुंपक को राज्य सौंप दिया। लुंपक ने श्रद्धापूर्वक राजपाट संभाला और धर्म-कर्म करने लगा। अंत में, सफला एकादशी के प्रभाव से उसे विष्णु लोक में स्थान मिला।