Shakambhari Purnima 2026: आज मनाई जा रही शाकंभरी जयंति, जानिए कौन हैं मां शाकंभरी, पूजा मुहूर्त और विधि

Shakambhari Purnima 2026: माता शाकंभरी को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। शाकंभरी देवी को कृषि और प्रकृति की देवी भी कहा जाता है। माना जाता है कि इनकी उत्पत्ति पौष माह की पूर्णिमा के दिन हुई थी, इसलिए आज इनकी जयंति मनाई जाती है। आइए जानें आज का पूजा मुहूर्त और विधि

अपडेटेड Jan 03, 2026 पर 12:55 PM
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पौष मास की पूर्णिमा को शाकंभरी जयंती के साथ ये उत्सव सम्पन्न होता है।

Shakambhari Purnima 2026: आज पौष माह का अंतिम दिन पौष पूर्णिमा है। आज के दिन मां शाकंभरी पूर्णिमा या शाकंभरी जयंति के रूप में भी मनाया जाता है। माता शाकंभरी को मां दुर्गा का ही रूप माना जाता है। शाकंभरी माता की पूजा पोषण, भोजन, हरियाली, सब्जियों, फलों और प्रकृति की प्रचुरता की देवी के रूप में की जाती है। भक्तों का मानना है कि शाकंभरी पूर्णिमा पर प्रार्थना करने से स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। शाकंभरी देवी को कृषि और प्रकृति की देवी भी कहा जाता है। आज के दिन शाकंभरी उत्सव का समापन होता है। शाकंभरी उत्सव की शुरुआत पौष मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है। पौष मास की पूर्णिमा को शाकंभरी जयंती के साथ ये उत्सव सम्पन्न होता है।

कौन हैं मां शाकंभरी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार दुर्गम दैत्य के कुप्रभाव से धरती पर अन्न-जल सब समाप्त हो गया था। दैत्य ने देवताओं के चारों वेद भी चुरा लिए थे। धर्मग्रंथों में देवी शाकम्भरी को आदिशक्ति दुर्गा का अवतार बताया गया है। शाकम्भरी माता ने दुर्गम दैत्य का वध करके धरती को सुख-समृद्धि प्रदान की और वृक्ष, फलों, औषधियों, शाक आदि से धरती का पालन-पोषण किया। इसलिए उनका नाम शाकंभरी पड़ा। शाकंभरी शब्द शाक और अंभरी से बना है, जिसमें शाक का अर्थ है सब्जी और अंभरी का मतलब है भरने वाली। आज के दिन उन्हें सब्जियों की देवी, फलों की देवी हरियाली और पोषण की देवी के रूप में पूजा जाता है।

शाकंभरी पूर्णिमा तारीख और मुहूर्त

  • शाकंभरी पूर्णिमा : शनिवार, 3 जनवरी, 2026
  • पूर्णिमा तिथि शुरू : 02 जनवरी, 2026 को शाम 06:53 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त : 03 जनवरी, 2026 को दोपहर 03:32 बजे

शाकंभरी नवरात्रि


शाकंभरी नवरात्रि पौष माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू होती है और पूर्णिमा पर समाप्त होती है। यह आम तौर पर आठ दिनों तक चलती है। हालांकि कभी-कभी यह सात या नौ दिनों तक भी चल सकती है।

पूजा विधि

शाकंभरी पूर्णिमा के दिन स्नान-ध्यान के बाद सबसे पहले देवी दुर्गा के इस दिव्य स्वरूप की विधि-विधान से पूजा और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। पूजा स्थान पर लाल रंग का आसन बिछाकर देवी का चित्र स्थापित करें और पूरे विधि-विधान से पूजा करें। माता को गंगाजल, चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प, फल, शाक-सब्जी आदि अर्पित करें, कथा का पाठ करें या सुनें। पूजा के अंत में माता की आरती जरूर करें। शाकंभरी माता की पूजा का पुण्यफल पाने के लिए इस दिन मंदिर में फल और सब्जी चढ़ाएं और जरूरतमंद लोगों को इसे दान करें।

Paush Purnima 2026: पौष पूर्णिमा आज, पढ़ें स्नान-दान का मुहूर्त और पूजा विधि

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