Shani Pradosh Vrat 2026: शनि दोष में राहत के लिए फाल्गुन के पहले प्रदोष व्रत पर करें ये उपाय, जानें व्रत का मुहूर्त और विधि

Shani Pradosh Vrat 2026: फाल्गुन मास का पहला प्रदोष व्रत आने वाला है। महाशिवरात्रि से पहले आने वाला प्रदोष व्रत भी भगवान शिव को समर्पित होता है और इसमें प्रदोष काल में पूजा की जाती है। आइए जानें इस व्रत में शनि दोष शांति के लिए क्या उपाय कर सकते हैं

अपडेटेड Feb 12, 2026 पर 9:25 PM
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हिंदू माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है।

Shani Pradosh Vrat 2026: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। प्रत्येक हिंदू माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। अब हिंदू वर्ष के अंतिम फाल्गुन मास का प्रदोष व्रत आने वाला है। फाल्गुन मास की त्रयोदशी तिथि शनिवार को पड़ रही है, इसलिए ये शनि प्रदोष व्रत होगा। इस व्रत में शनि दोष शांति के उपाय करने से सफलता मिलती है। आइए जानें व्रत की तारीख, शनि दोष शांति के उपाय और पूजा का मुहूर्त क्या है?

शनि प्रदोष व्रत : 14 फरवरी 2026, शनिवार

पूजा का शुभ मुहूर्त : 14 फरवरी 2026 की शाम 06:01 से रात्रि 08:32 बजे तक

शनि प्रदोष पूजा विधि

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत की पूजा के लिए प्रदोष काल को सबसे उत्तम माना गया है। आइए जानें शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि :


  • सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए।
  • साफ कपड़े पहनें। संभव हो तो प्रदोष व्रत वाले दिन सफेद रंग अथवा उजले रंग के कपड़े धारण करें।
  • प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में दोबारा पूरे विधि-विधान से करें।
  • यदि संभव हो तो भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने के साथ रुद्राभिषेक भी करें।
  • भगवान शिव को उनकी प्रिय चीजें जैसे गंगाजल, बेलपत्र, भांग, भस्म, रुद्राक्ष आदि जरूर अर्पित करें।
  • प्रदोष काल के समय रुद्राक्ष की माला से शिव मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करें।
  • प्रदोष व्रत की पूजा के बाद भगवान शिव की आरती अवश्य करें।
  • अंत में सभी को प्रसाद बांटकर खुद भी ग्रहण करें।

शनि प्रदोष व्रत का उपाय

शनि प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ शनि देव की भी विधि-विधान से पूजा करें। इस दिन शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने के बाद शनि चालीसा, शनि स्तोत्र का पाठ और शनि मंत्र का जाप जरूर करें। इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं और उसकी परिक्रमा करें।

शनि प्रदोष व्रत वाले दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार काले तिल के लड्डू, काला कंबल, काले रंग के जूते या चप्पल, लोहे के बर्तन, काली उड़द की दाल और सरसों का तेल का दान करें। इन सभी सामान को एक दिन पहले खरीद कर रख लें।

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