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Sheetl Ashtami 2026: 11 मार्च को शितला अष्टमी, मां शीतला को बासोड़ा पर लगाएं इन 4 चीजों का भोग

Sheetl Ashtami 2026: शीतला अष्टमी का व्रत हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी को किया जाता है। इस दिन आरोग्य और स्वच्छता की देवी माता शीतला की पूजा की जाती है। खास बात ये है कि इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता, लोग बासी खाना खाते हैं और माता शीतला को भी वही भोग चढ़ाते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 06, 2026 पर 7:42 PM
Sheetl Ashtami 2026: 11 मार्च को शितला अष्टमी, मां शीतला को बासोड़ा पर लगाएं इन 4 चीजों का भोग
चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी दोनों तिथियां माता शीतला को समर्पित हैं।

Sheetl Ashtami 2026: शीतला माता को हिंदू धर्म में स्वच्छता और आरोग्य की देवी के रूप में पूजा जाता है। माता शीतला की पूजा, चेचक, खसरा या स्किन इनफेक्शन या अन्य संक्रामक रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है। इनकी पूजा होली के आठ दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को की जाती है। हालांकि कहीं-कहीं शीतला सप्तमी मनाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी दोनों तिथियां माता शीतला को समर्पित हैं।

इनकी पूजा की विशेष बात ये है कि इस दिन चूल्हा नहीं जलता है। सभी लोग बासी भोजन ग्रहण करते हैं और माता शीतला को भी बासी भोग ही अर्पित किया जाता है। इसीलिए इस व्रत को बासोड़ा व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस पूजा का वैज्ञानिक या चिकिस्कीय आधार कहता है कि भारत में इस समय मौसम बदल रहा होता है और गर्मियां शुरू हो रही होती हैं। ऐसे में शरीर के लिए अब गर्म खाना या गर्म चीजें सुपाच्य नहीं रह जाती हैं। इसलिए ठंडा और बासी खाना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और पाचन तंत्र को आराम पहुंचाता है। आइए जानें इस साल शीतला अष्टमी का व्रत किस दिन किया जाएगा और इसमें कौन सी 4 चीजें माता शीतला को भोग में अर्पित कर सकते हैं ?

कब है शीतला अष्टमी?

इस साल शीतला अष्टमी यानी बसौड़ा 11 मार्च को है। होली के आठ दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है।

शीतला अष्टमी से जुड़ी मान्यताएं

शीतला मां को रोगों से बचाने वाली देवी माना गया है। खासकर स्किन इंफेक्शन या चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव के लिए शीतला माता की पूजा का खास महत्व बताया जाता है। चूंकि इस समय सर्दियां खत्म होती हैं और गर्मियां शुरू होती हैं, तो वैज्ञानिक रूप से भी इस दिन का महत्व है। सबसे खास बात है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता बल्कि, एक दिन पहले बने खाने को खाया जाता है। इसी से देवी की पूजा भी की जाती है।

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