Som Pradosh Vrat 2025: नवंबर में फिर से आने वाला है सोम प्रदोष व्रत, जानें इस दिन बना रहे शुभ संयोग के बारे में

Som Pradosh Vrat 2025: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दिन का हिंदू धर्म में बहुत महत्व माना जाता है। इसका महत्व इसके होने वाले दिन से बढ़ जाता है। इसी माह नवंबर में एक बार सोम प्रदोष व्रत किया जा चुका है और दूसरा आने वाला है। इस दिन शुभ संयोग भी बन रहा है।

अपडेटेड Nov 10, 2025 पर 12:59 PM
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प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है।

Som Pradosh Vrat 2025: प्रत्येक हिंदू माह में प्रदोष व्रत दो बार आता है। इस तरह एक साल में कम से कम 24 प्रदोष व्रत आते हैं। प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत किया जाता है। प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्रदोष व्रत का महत्व उस दिन के अनुसार और भी बढ़ जाता है। जैसे त्रयोदशी तिथि अगर शनिवार को पड़ रही है, तो शनि प्रदोष प्रत होता है। वहीं, सोमवार के दिन यह तिथि पड़ने पर सोम प्रदोष व्रत किया जाता है। इस माह नवंबर में एक बाद 3 तारीख को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत हुआ था। इस महीने का दूसरा प्रदोष प्रत भी सोमवार के दिन किया जाएगा। आइए जानें इसकी तारीख मुहूर्त और शुभ संयोग

कार्तिक महीने की समाप्ति के बाद मार्गशीर्ष महीना शुरू हो चुका है और इस महीने का पहला प्रदोष व्रत बेहद खास है। बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के तीर्थ पुरोहित प्रमोद श्रृंगारी ने लोकल 18 को बताया कि मार्गशीर्ष महीने का प्रदोष व्रत 17 नवंबर को रखा जाएगा। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 17 नवंबर की सुबह 4:47 से शुरू होकर 18 नवंबर की सुबह 7:12 तक रहेगी। ऐसे में 17 नवंबर को सोम प्रदोष व्रत रखना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

बहुत शुभ होता है सोम प्रदोष का व्रत

यह व्रत अगर सोमवार को पड़े तो अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से जीवन के सारे दुख और दोष दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस व्रत को करने से ऋण और रोग खत्म होते हैं और सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है. हिंदू मान्यता के अनुसार, किसी भी कामना की पूर्ति के लिए कम से कम 11 प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए। माना जाता है कि प्रदोष व्रत से शिव-पार्वती के साथ चंद्र देवता की भी कृपा बरसती है।

सोम प्रदोष का महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार सोमवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है क्योंकि यह उस तिथि और दिन का संगम होता है, जो भगवान शिव को ही समर्पित है। इस प्रदोष को विधि-विधान से करने पर शिव-पार्वती संग चंद्र देवता की भी कृपा प्राप्त होती है। इस प्रकार सोम प्रदोष व्रत साधक को सुख, शांति और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिलाने का माध्यम बनता है।


वृश्चिक संक्रांति का शुभ संयोग

मार्गशीर्ष महीने के पहले प्रदोष व्रत के दिन अद्भुत संयोग बन रहा है। प्रदोष व्रत सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाएगा, जो भगवान शिव का दिन होता है। साथ ही उस दिन वृश्चिक संक्रांति भी है। इस दिन द्विपुष्कर योग भी है। ऐसे में जो भी भक्त प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की षोडशोपचार विधि से पूजा करेंगे, उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और घर में हमेशा सुख-समृद्धि की वृद्धि होगी।

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