Subh Muhurat Year 2026: हिंदू धर्म में कोई नया, शुभ या मांगलिक कार्य शुरू करने से पहले मुहूर्त और दिन, वार आदि देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आज भी शादी, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों करने से पहले शुभ मुहूर्त देखा जाता है। कई बार शुक्र या बृहस्पति के अस्त होने पर भी मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। ऐसे अबूझ मुहूर्त लोगों की मदद करते हैं। यानी जब शुभ मुहूर्त का रास्ता बंद होता है, तो कई बार ऐसी तिथियां रास्ता खोल देती हैं। हिंदू कैलेंडर में ऐसी कई तिथियां हैं, जिन पर शुभ और मांगलिक कार्य करने से पहले मुहूर्त और दिन/वार देखने की जरूरत नहीं होती है। इन तिथियों पर आप आंख बंद करके कोई भी शुभ और मांगलिक काम कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि ये शुभ तिथियां कौन-कौन सी हैं और इस नए साल 2026 में कब-कब आएंगी?
बसंत पंचमी : बसंत पंचमी का त्योहार हर साल माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। बसंत पचमी का त्योहार इस बार 23 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन ज्ञान, कला और संगीत की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। ये दिन विवाह समेत तमाम शुभ और मांगलिक कामों के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
फुलेरा दूज : फाल्गुन शुक्ल की द्वितीया तिथि को होली से ठीक पहले फुलेरा दूज मनाया है। इस दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा की जाती है। ये दिन विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या किसी भी अन्य शुभ काम के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस साल ये पर्व 19 फरवरी को मनाया जाएगा।
अक्षय तृतीया : वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं और नए कार्यों की शुरुआत या नई चीजों की खरीदारी करने के लिए ये बड़ा शुभ होता है। इस साल 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी।
जानकी नवमी : हर साल वैशाख मास की नवमी तिथि के दिन जानकी नवमी मनाई जाती है। ये शुभ दिन माता सीता के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो शुभ काम किए जाते हैं, उनके सफल होने की संभावना बहुत अधिक होती है। इस साल ये पर्व 25 अप्रैल को मनाया जाएगा।
भड़ली नवमी : आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी कहा जाता है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इस तिथि पर पंचांग देखे बिना भी लगन, विवाह, गृह प्रवेश या अन्य शुभ काम किए जा सकते हैं। इस साल भड़ली नवमी 22 जुलाई को मनाई जाएगी।
देवउठनी एकादशी : कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इस दिन शुभ और मांगलिक कामों पर लगी पाबंदी हट जाती है और मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। इस साल देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को रहेगी।