Paush Purnima 2026: पौष का महीना सूर्य देव को समर्पित होता है। इस माह में नियमित सूर्य भगवान की पूजा करने और उन्हें अर्घ्य अर्पित करना बहुत पुण्य फल देने वाला माना जाता है। सूर्य देव की पूजा करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की कामना पूर्ण होती है। इससे करियर और व्यापार से जुड़ी समस्याओं का समाधान होने के साथ व्यक्ति के तेज में निखार आता है। पौष माह को छोटा पितृ पक्ष भी कहते हैं, यानी इस माह में पितरों की पूजा का भी विशेष स्थान है।
इस माह में पितरों का पिंडदान और तर्पण करने से पितृ दोष शांत होता है। पौष माह की पूर्णिमा तिथि विशेष संयोग वाली होती है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा की एक साथ पूजा करने का अद्भुत अवसर प्राप्त होता है। इसके साथ ही ये पूर्णिमा पितृ दोष शांत करने के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन सत्यनारायण भगवान की कथा कराने से पुण्य मिलता है और सुख-समृद्धि आती है। आइए जानें इस दिन बन रहे शुभ योग और लक्ष्मी मां की कृपा पाने के लिए किए जाने वाले उपाय के बारे में
पंचांग के अनुसार, पौष माह की पूर्णिमा 2 जनवरी को शाम 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 3 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। उदाया तिथि के अनुसार पौष पूर्णिमा 3 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।
पूर्णिमा के दिन क्या करें
पौष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा आराधना अवश्य करें। इसके साथ ही उस दिन चन्द्रमा को भी अर्घ्य प्रदान कर सकते हैं। यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है तो पूर्णिमा तिथि पर कुछ उपाय कर उसे मजबूत किया जा सकता है। पूर्णिमा तिथि पर सफेद रंग की चीजों का दान करें। दूध, चावल, चीनी, चांदी, सफेद वस्त्र, सफेद चंदन और खीर का प्रसाद के रूप में वितरण किया जा सकता है।