Vaishakh Amavasya 2026 Panchak: आज वैशाख माह की अमावस्या तिथि है। हिंदू धर्म में पूरे साल में 12 अमावस्या तिथियां आती हैं। अमावस्या तिथि मुख्य रूप से पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या पर पितरों को तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनके आशीर्वाद बना रहता है। कालसर्प दोष निवारण के लिए भी यह दिन उत्तम है। इस साल वैशाख अमावस्या बहुत खास मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन दोपहर तक पंचक भी है। पंचक के नियमों के अनुसार इस दिन कुछ खास कार्यों को करने से बचना चाहिए। आइए जानें आज के मुहूर्त और पंचक का समय
अमावस्या तिथि शुक्रवार की दोपहर 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू हो जाएगी। हालांकि, उदयातिथि के अनुसार, पूरे दिन अमावस्या तिथि का ही मान होगा।
सूर्योदय : 5 बजकर 54 मिनट पर
सूर्यास्त : शाम 6 बजकर 48 मिनट पर
योग : वैधृति सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक
करण चतुष्पाद : सुबह 6 बजकर 49 मिनट तक
दृक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रभावी रहेगा। अमृत सिद्धि योग सुबह 5 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 2 मिनट तक रहेगा।
अमृत काल : सुबह 9 बजकर 50 मिनट से 11 बजकर 18 मिनट तक
अभिजित मुहूर्त : दोपहर 11 बजकर 55 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त : शाम 6 बजकर 47 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 4 बजकर 25 मिनट से 5 बजकर 9 मिनट तक
अशुभ समय : राहुकाल सुबह 10 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक
यमगंड : दोपहर 3 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 11 मिनट तक
गुलिक काल : सुबह 7 बजकर 31 मिनट से 9 बजकर 7 मिनट तक
दुर्मुहूर्त : सुबह 8 बजकर 29 मिनट से 9 बजकर 20 मिनट तक और दोपहर 12 बजकर 47 मिनट से 1 बजकर 38 मिनट तक
द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को पड़ रही है, लेकिन इस बार यह पंचक के दौरान आ रही है। पंचांग के मुताबिक, 13 अप्रैल से शुरू हुए पंचक 17 अप्रैल दोपहर 12 बजकर 2 मिनट तक रहेंगे। अमावस्या के स्नान, दान और तर्पण के कार्य इसी दौरान किए जाएंगे। ज्योतिष के अनुसार, इस दुर्लभ संयोग को देखते हुए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी माना जा रहा है।