Vaishakh First Pradosh Vrat Date: वैशाख माह का पहला प्रदोष व्रत होगा इस दिन, जानें बुध प्रदोष व्रत की तारीख, महत्व और नियम

Vaishakh First Pradosh Vrat Date: वैशाख माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस माह का यह पहला प्रदोष व्रत होगा। आइए जानें भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित प्रदोष की किस तारीख को होगा और इसका महत्व और नियम क्या हैं

अपडेटेड Apr 04, 2026 पर 7:00 PM
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वैशाख माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 15 अप्रैल को किया जाएगा।

Vaishakh First Pradosh Vrat Date: हिंदू कैंलेंडर के दूसरे महीने वैशाख की शुरुआत हो चुकी है। वर्ष के अन्य महीनों की तरह इस माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाएगा। बता दें, हर माह में दो प्रदोष व्रत के हिसाब से साल में 24 प्रदोष व्रत आते हैं। यह व्रत सप्ताह जिस दिन होता है, उसके अनुसार इसका नाम होता है। जैसे सोमवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत सोम प्रदोष होता है और शनिवार को पड़ने वाला शनि प्रदोष व्रत कहलाता है, जबकि मंगलवा के प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष कहते हैं। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को इस माह का पहला प्रदोष होगा।

प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। प्रदोष व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद किया जाता है। देवाधिदेव महादेव की पूजा के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि प्रदोष व्रत को करने से दुख दूर होते हैं, ग्रहों के दोष दूर होते हैं और आपनी संबंधों में बेहतर तालमेल आता है।

वैशाख माह के पहले प्रदोष व्रत की तारीख

पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 15 अप्रैल को रात 12 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा। ऐसे में 15 अप्रैल को प्रदोष व्रत किया जाएगा। यह व्रत बुधवार को पड़ रहा है, जिससे यह बुध प्रदोष बन रहा है। बुध बुधवार का स्वामी ग्रह है। इसलिए, बुधवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत बुद्धि, वाणी और बिजनेस के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए फायदेमंद माना जाता है।

बुध प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्त

बुध प्रदोष पूजा का शुभ समय 15 अप्रैल, 2026 को शाम 6:56 बजे से रात 9:13 बजे तक है।


जरूर करें इन नियमों का पालन

  • सुबह जल्दी उठें, नहाएं और साफ कपड़े पहनें।
  • सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान को साफ करें और भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें।
  • शिव परिवार की पूजा करें और शिवलिंग पर बेलपत्र, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें।
  • प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें।
  • भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें।

बुध प्रदोष व्रत का महत्व

प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का एक श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है। खासकर जब यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत और पूजा करने से भोलेनाथ भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। प्रदोष व्रत का पुण्य प्रभाव नकारात्मकता और पापों का नाश कर सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग खोलता है।

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