Varuthini Ekadashi 2026: वरूथिनी एकादशी पर इस विधि से करें शिवलिंग का अभिषेक, सुख-समृद्धि का रास्ता खुलेगा और दूर होंगे ग्रह दोष

Varuthini Ekadashi 2026: वरूथिनी एकादशी का व्रत विष्णु भगवान को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है। इसके साथ ही इस दिन शिवलिंग पर विशेष सामग्री अर्पित करने भगवान शिव की भी कृपा प्राप्त की जा सकती है। शिवलिंग पर विशेष सामग्री अर्पित करने से कई तरह के ग्रह दोष होंगे

अपडेटेड Apr 10, 2026 पर 5:46 PM
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वरूथिनी एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु के साथ ही भगवान शिव की पूजा की जाती है।

Varuthini Ekadashi 2026: वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरूथिनी एकादशी का व्रत किया जाता है। माना जाता है विधि-विधान और श्रद्धा के साथ एकादशी का व्रत करने वाले अपने भक्तों को भगवान श्री हरि विष्णु का साथ मिलता है। भगवान अपने भक्तों की हर पीड़ा और मुश्किल दूर करते हैं। ये व्रत इतना पावन और प्रभावशाली है कि इसे करने से 10000 वर्षों की तपस्या का फल मिलता है।

धर्म ग्रंथों में इस व्रत को कन्यादान करने जितना पुण्य फल प्रदान करने वाला बताया गया है। वरूथिनी एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु के साथ ही भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस दिन शिवलिंग पर विशेष सामग्री अर्पित करने से कई तरह के ग्रह दोष शांत होते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव को प्रसन्न करने का दुर्लभ संयोग मिलता है।

वरूथिनी एकादशी 2026 तारीख और शुभ योग

पंचांग के अनुसार, वरूथिनी एकादशी का व्रत वैशाख कृष्ण एकादशी को किया जाएगा। वैशाख कृष्ण एकादशी तिथि 13 अप्रैल को मध्यरात्रि 01:16 बजे से शुरू होगी और यह 14 अप्रैल को मध्यरात्रि 01:08 बजे खत्म होगी। उदयातिथि के आधार पर वैशाख की पहली एकादशी यानि वरूथिनी एकादशी 13 अप्रैल सोमवार को है।


इस साल वरूथिनी एकादशी पर दो शुभ योग बन रहे हैं। वरूथिनी एकादशी पर शुभ योग प्रात:काल से लेकर शाम 05:17 बजे तक है, उसके बाद से शुक्ल योग बनेगा। वरूथिनी एकादशी पर धनिष्ठा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 04:03 बजे तक है, उसके बाद शतभिषा नक्षत्र है।

वरूथिनी एकादशी पर शिवलिंग पर अर्पित करें ये चीजें

शमी के फूल : वरूथिनी एकादशी के दिन शमी के फूल शिवलिंग पर अर्पित करने से भगवान शिव खुश होते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से रोग-दोष से मुक्ति मिलती है।

बिल्वपत्र : बिल्वपत्र भगवान शिव को बहुत प्रिय है। इसे शिवलिंग पर चढ़ाने मात्र से ही सभी पापों का नाश हो जाता है। बिल्व पत्र पर थोड़ा-सा शहद लगाकर उसे शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है।

कच्चे चावल : शनि दोष से मुक्ति के लिए इस शुभ दिन पर शिवलिंग पर कच्चे चावल में थोड़े से काले तिल मिलाकर अर्पित करें। चढ़ाने के बाद उन्हीं चावल में मिले तिल को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें।

गाय का घी : वरूथिनी एकादशी के दिन शुद्ध गाय के घी से शिवलिंग का अभिषेक करें। कहा जाता है कि इससे रोग-दोष दूर होते हैं।

महामृत्युंजय मंत्र : भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप 108 बार करें। ऐसा करने से जीवन पर आने वाले संकट टल जाते हैं। इसके साथ ही महादेव की कृपा मिलती है।

इन मंत्रों के जाप से मिलेगी शांति

ॐ पार्वतीपतये नम:॥

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥

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