Varuthini Ekadashi 2026 Niyam: वरूथिनी एकादशी का व्रत करने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, पालन नहीं हुआ तो नाराज हो जाएंगे भगवान

Varuthini Ekadashi 2026 Niyam: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वरूथिनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस व्रत के कुछ सख्त नियम हैं, जिनकी अनदेखी करने पर भगवान नाराज हो सकते हैं और आपके व्रत का फल उल्टा हो सकता है। आइए जानें क्या हैं वरूथिनी एकादशी व्रत का ये नियम

अपडेटेड Apr 08, 2026 पर 7:00 AM
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धार्मिक ग्रंथों में वरुथिनी एकादशी पर कुछ कार्य वर्जित बताए गए हैं।

Varuthini Ekadashi 2026 Niyam: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। हर हिंदू माह की तरह वैशाख माह में भी एकादशी आती है, जिसे वरूथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किए जाने वाले इस व्रत ये 10000 वर्षों की तपस्या के बराबर फल की प्राप्ति होती है। इस साल ये एकादशी व्रत 13 अप्रैल को किया जाएगा। आइए जानें इस व्रत के क्या सख्त नियम हैं, जिनमें चूक होने पर भगवान नाराज हो सकते हैं ? साथ ही, जानेंगे इस तिथि का समय और व्रत पारण की तारीख और समय।

एकादशी व्रत की तारीख

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

एकादशी तिथि प्रारंभ- 13 अप्रैल 2026, रात 01:16 बजे

एकादशी तिथि समाप्त- 14 अप्रैल 2026, रात 01:08 बजे

एकादशी व्रत पारण का समय


पारण की तारीख- मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

पारण का समय- सुबह 06:54 बजे से 08:31 बजे तक

वरूथिनी एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म ग्रंथों में एकादशी तिथि विष्णु भगवान को समर्पित बताई गई है। हरिद्वार के ज्योतिषी पंडित श्रीधर शास्त्री ने लोकल 18 से बताया कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से कन्यादान और 10 हजार वर्षों की तपस्या के बराबर फल मिलता है। भविष्य पुराण में वरुथिनी एकादशी का वर्णन विस्तार से है। इस दिन व्रत करने और विष्णु भगवान की आराधना करने से जन्मों-जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों में वरुथिनी एकादशी पर कुछ कार्य वर्जित बताए गए हैं। इन्हें करने से जीवन में अनेक समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

24 घंटे पहले छोड़ दें ये चीजें

वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से 24 घंटे पूर्व तामसिक और मांसाहारी पदार्थ का सेवन वर्जित है। पदार्थ जैसे प्याज, लहसुन, शलजम, बैंगन आदि का सेवन 12 अप्रैल की सुबह से ही बंद कर देना चाहिए। मांसाहारी पदार्थ और मादक पेय पदार्थ जैसे अंडा, मांस, मछली, शराब, गुटका, खैनी, बीड़ी और सिगरेट आदि भी व्रत के दौरान पूर्ण रूप से वर्जित है।

इन बातों से नाराज होते हैं भगवान

पंडित शास्त्री के मुताबिक, वरुथिनी एकादशी व्रत के दौरान साधकों के मन में नकारात्मक भाव, दूसरों के प्रति ईर्ष्या, गलत भावना, मन में अपवित्रता आदि आने से भी विष्णु भगवान नाराज हो जाते हैं। इस दिन व्रत करने के साथ जाने-अनजाने में वर्जित पदार्थों का सेवन करने और मन में नकारात्मक भाव होने से साधकों को व्रत का विपरीत परिणाम मिलता है, जिसका उपाय करने पर भी समाधान नहीं होता है।

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