Vat Savitri Vrat 2026: मई में इस दिन सुहागिनें करेंगी वट सावित्री का व्रत, जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ये व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को किया जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। आइए जानें इस साल ये व्रत किस दिन किया जाएगा, इसका पूजा मुहूर्त और विधि

अपडेटेड Apr 17, 2026 पर 5:48 PM
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ये व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि और और ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन किया जाता है।

Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री का व्रत हिंदू धर्म के अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली व्रत में से एक माना जाता है। विवाहित स्त्रियां ये व्रत पति की लंबी उम्र, संतान प्राप्ति और सौभाग्य की कामना के लिए करती हैं। ये व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि और और ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन किया जाता है। इस व्रत को वरगदाई के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि जो स्त्रियां पूरी आस्था और विधि-विधान से ये व्रत करती हैं, वह सभी पापों से मुक्त होकर निश्चित रूप से अखंड सौभाग्य प्राप्त करती हैं। व्रत करने वाली विवाहित स्त्रियां इस दिन वट वृक्ष की पूजा करती हैं। वट वृक्ष दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक है, इसलिए पति की लंबी आयु के लिए इसकी पूजा की जाती है। इसके हर हिस्से में देवताओं का वास है। माना जाता है कि इसकी जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव वास करते हैं।

वट सावित्री व्रत 2026 की तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 मई को सुबह 05 बजकर 11 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 17 मई को रात 01 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, वट सावित्री व्रत 16 मई को किया जाएगा।

वट सावित्री व्रत के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 07 मिनट से 04 बजकर 48 मिनट तक

विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 4 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक


गोधूलि मुहूर्त - शाम 07 बजकर 04 मिनट से 07 बजकर 25 मिनट तक

निशिता मुहूर्त - रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक (17 मई)

पति-पत्नी के बीच तनाव दूर करने के लिए उपाय

पति-पत्नी के बीच का चल रहा तनाव से छुटकारा पाने के लिए पूजा के दौरान बरगद के पेड़ की जड़ में सिंदूर अर्पित करें। उस सिंदूर से अपनी मांग भरे और भगवान से सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है और शुभ फल मिलता है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • किसी से वाद-विवाद न करें।
  • काले रंग के कपड़े धारण न करें।
  • व्रत कथा का पाठ करें।
  • अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें।

वट सावित्री व्रत पूजा विधि

  • सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  • बांस की दो टोकरी लें, उसमें सप्तधान्य भर लें।
  • उनमें से एक पर ब्रह्मा और सावित्री व दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की प्रतिमा स्थापित करें।
  • सावित्री की पूजा में श्रृंगार का सामान चढ़ाएं और मंत्र से अर्घ्य दें।
  • वटवृक्ष की पूजा करें और उसके जड़ों में प्रार्थना करते हुए जल चढाएं।
  • वटवृक्ष की 108, 28 या फिर न्यूनतम सात बार परिक्रमा करते हुए तने पर कच्चा सूत लपेटें।
  • वट सावित्री व्रत कथा सुनना या पढ़ना जरूरी माना गया है।
  • पूजा के अंत में अपने पति की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

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