Vijaya Ekadashi 2026: फरवरी का पहला एकादशी व्रत होगा इस दिन, जानें भगवान श्री राम ने क्यों किया था विजया एकादशी व्रत?

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस तिथि पर भक्त उनकी पूजा और उपवास करते हैं। इस व्रत को भगवान श्री राम ने भी किया था। आइए जानें इसकी तारीख और व्रत की कथा

अपडेटेड Feb 04, 2026 पर 4:01 PM
Story continues below Advertisement
साल में आने वाली 24 एकादशी तिथियों में से एक है विजया एकादशी।

Vijaya Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। हर हिंदू मास में एकादशी व्रत कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, दो बार किया जाता है। इस तरह साल में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, क्योंकि यह तिथि श्री हरि विष्णु को समर्पित है। इस दिन कुछ भक्त जहां फलाहार व्रत करते हैं, वहीं कुछ अन्य भक्त निर्जला उपवास भी करते हैं। माना जाता है विधि-विधान से एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के सभी दुख दूर करते हैं।

साल में आने वाली 24 एकादशी तिथियों में से एक है विजया एकादशी। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी कठिनाइयां दूर होती हैं और विजय सुनिश्चित होती है। इस एकादशी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि पद्म पुराण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए विजया एकादशी का व्रत किया था। आइए जानें इस साल विजया एकादशी कब की जाएगी और इसकी क्या कथा है ?

विजया एकादशी तारीख

फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगा। इस तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर होगा। उदया तिथि के मुताबिक, विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा। इस व्रत का पारण अगले दिन 14 फरवरी को सुबह 7 बजे से सुबह 9 बजकर 14 मिनट तक की अवधि में किया जाएगा।

विजया एकादशी व्रत कथा

भगवान श्रीराम जब लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि समुद्र बहुत गहरा और विशाल है। उसमें कई खतरनाक पानी के जीव भी हैं। यह देखकर श्रीराम चिंतित हो गए और लक्ष्मण से बोले कि समुद्र पार करने का कोई आसान उपाय उन्हें दिखाई नहीं दे रहा है। तब लक्ष्मण ने सुझाव दिया कि पास ही मुनि बकदाल्भ्य का आश्रम है, जो बहुत ज्ञानी और तपस्वी हैं। उनसे उपाय पूछना चाहिए।


लक्ष्मण की बात मानकर भगवान श्रीराम मुनि बकदाल्भ्य के आश्रम पहुंचे और उन्हें प्रणाम किया। मुनि ने श्रीराम को पहचान लिया और उनके आगमन से प्रसन्न हुए। जब श्रीराम ने समुद्र पार करने का उपाय पूछा, तो मुनि बकदाल्भ्य ने कहा कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत करने से निश्चित रूप से विजय प्राप्त होगी।

मुनि की आज्ञा अनुसार भगवान श्रीराम ने विजया एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से वे अपनी वानर सेना के साथ समुद्र पार करने में सफल हुए। शास्त्रों में कहा गया है कि जो व्यक्ति विधि-विधान से विजया एकादशी का व्रत करता है, उसे जीवन में सफलता और विजय मिलती है।

विजया एकादशी पूजा विधि

  • एकादशी की पूजा के लिए एक चौकी पर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
  • भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र चढ़ाएं और फूलों की माला अर्पित करें।
  • अब प्रभु को चंदन लगाएं और उनके सामने शुद्ध देसी घी का दीप जलाएं।
  • पंचामृत, पीली मिठाई, गुड़ और चने का भोग अर्पित कर दें।
  • विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें और विजया एकादशी का पाठ करें।
  • अंत में आरती करें और अपनी क्षमतानुसार दान-दक्षिणा जैसे कार्य करें।

Mahashivratri 2026 Upay: महाशिवरात्रि में करें शमी के पौधे के ये चार, रातों-रात बदल जाएगी आपकी किस्मत

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।