Vijaya Ekadashi 2026: एकादशी व्रत जितना ही महत्वपूर्ण होता है पारण, जानें पारण का मुहूर्त और पूरी विधि

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का व्रत हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। एकादशी व्रत का जितना महत्व है, उतना ही जरूरी है सही विधि से इसका पारण करना। आइए जानें विजया एकादशी व्रत के पारण का समय और सम्पूर्ण विधि

अपडेटेड Feb 11, 2026 पर 7:00 AM
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विजया एकादशी का व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है।

Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का व्रत हिंदू कैलेंडर में पूरे वर्ष में आने वाली 24 एकादशी व्रतों में से एक है। यह व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत में भक्त पूरे दिन उपवास करते हैं और श्री हरि की पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करते हैं। बहुत से भक्त इस दिन निर्जला उपवास और रात्रि जागरण भी करते हैं। इस व्रत को भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का व्रत जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्व इसके पारण का भी है। माना जाता है कि एकादशी व्रत का सही विधि और मुहूर्त में पारण करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपने भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं।

विजया एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर होगा। ऐसे में इस बार विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी को किया जाएगा।

सर्योदय - सुबह 07 बजकर 01 मिनट पर

सूर्यास्त - शाम 06 बजकर 10 मिनट पर

ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 09 मिनट तक


विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 12 मिनट तक

गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 08 मिनट से 06 बजकर 24 मिनट तक

अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक

एकादशी व्रत पारण मुहूर्त

व्रत पारण का समय 14 फरवरी 2026 को सुबह 07:00 बजे से सुबह 09 बजकर 14 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है।

एकादशी व्रत पारण विधि

  • द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े धारण करें।
  • सूर्य देव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।
  • मंदिर की सफाई करें।
  • चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा को विराजमान करें।
  • फल, फूल और तुलसी के पत्ते अर्पित करें।
  • देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें।
  • मंत्रों का जप करें।
  • सात्विक भोजन का भोग लगाएं।
  • चरणामृत और तुलसी के पत्ते से व्रत का पारण करें।

इन चीजों का करें दान

द्वादशी तिथि पर दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन पूजा के बाद अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करें। एकादशी व्रत के बाद दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं।

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