T20 World Cup 2026: 7 फरवरी से आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 शुरु होने वाली है। इस टूर्नामेंट में कुल 20 टीमें हिस्सा ले रहीं हैं, जिन्हें चार ग्रुप में बांटा गया है। वहीं इस वर्ल्ड कप में दूसरी टीमों में कई भारतीय मूल के कई खिलाड़ी खेलेंगे। ऐसे में यहां हम आपको उन 5 भारतीय मूल के खिलाड़ियों के बारे में बताने वाले हैं, जो इस बार टी20 वर्ल्ड कप में अपने दमदार प्रदर्शन से कोहराम मचा सकते है।
सौरभ नेत्रावलकर अमेरिका की क्रिकेट टीम के बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ हैं। वे भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट भी खेल चुके हैं। वर्ल्ड कप के अपने पहले मैच के लिए वे मुंबई पहुंच चुके हैं। पिछले वर्ल्ड कप में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर खुद को साबित किया था। 34 साल के सौरभ नेत्रावलकर सिर्फ क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर भी हैं। 2024 वर्ल्ड कप में अमेरिका के बेहतरीन प्रदर्शन में उनकी अहम भूमिका रही थी। उस टूर्नामेंट में पहली बार खेलने वाली अमेरिकी टीम ने पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम को हराकर सुपर-8 चरण तक जगह बनाई थी।
नेत्रावलकर अब भारत की चुनौतीपूर्ण पिचों पर अच्छा प्रदर्शन करने को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि, उनके लिए यह मैच भावनात्मक भी होगा। वजह यह है कि 7 फरवरी को वानखेड़े स्टेडियम में उनका सामना अपने पुराने मुंबई टीम के साथी सूर्यकुमार यादव से होने वाला है। नेत्रावलकर का कहना है कि वे मैदान पर उतरते समय अपनी भावनाओं पर काबू रखकर पूरी तरह खेल पर ध्यान देना चाहेंगे।
मोनंक पटेल भारत के खिलाफ टूर्नामेंट के पहले मैच में अमेरिका (USA) टीम की कप्तानी करेंगे। गुजरात के आनंद में जन्मे मोनंक पटेल ने वर्ल्ड कप में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ मैच जिताने वाली शानदार अर्धशतकीय पारी खेली थी। 32 साल के मोनंक पटेल एक ओपनिंग बल्लेबाज़ हैं। वे अब अपने पुराने साथी जसप्रीत बुमराह का सामना करने को लेकर काफी उत्साहित हैं। दोनों ने साथ में गुजरात अंडर-19 टीम के लिए क्रिकेट खेला था। मोनंक ने कहा कि मैदान के बाहर वे अपने पुराने दिन याद कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जसप्रीत बुमराह आज भले ही दुनिया के सबसे बेहतरीन तेज़ गेंदबाज़ों में गिने जाते हों, लेकिन उनकी खास प्रतिभा बचपन में ही दिखने लगी थी।
जसप्रीत सिंह के लिए वर्ल्ड कप बेहद खास होने वाला है, क्योंकि यह उनका इंटरनेशनल डेब्यू है। फगवाड़ा में जन्मे जसप्रीत सिंह पर इस टूर्नामेंट में सभी की नज़रें रहेंगी। 32 साल के जसप्रीत सिंह साल 2006 में अपने परिवार के साथ इटली चले गए थे और मिलान के पास एक शहर में बस गए। वहां उन्होंने अपने क्रिकेट सफर की शुरुआत टेप-बॉल क्रिकेट से की। इसके बाद उन्होंने 2016–17 में रेड-बॉल क्रिकेट खेलना शुरू किया। मेहनत और लगातार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने 2019 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाई। जसप्रीत सिंह के लिए ICC टूर्नामेंट में खेलना एक सपने के पूरा होने जैसा है। खास बात यह है कि कुछ साल पहले तक वे अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए उबर ड्राइवर के तौर पर काम करते थे।
आर्यन दत्त को भारतीय दर्शकों के सामने खेलने का अनुभव पहले से है। उन्होंने 2023 ODI वर्ल्ड कप के दौरान भारत में मैच खेले थे। 22 साल के आर्यन नीदरलैंड्स टीम में भारतीय मूल के इकलौते खिलाड़ी हैं। इस टूर्नामेंट में उनका लक्ष्य बड़ी और मजबूत टीमों को चौंकाना है। आर्यन के परिवार ने 1980 के दशक में पंजाब से नीदरलैंड्स में बसना चुना था। उनके कुछ रिश्तेदार आज भी पंजाब में रहते हैं, इसलिए भारत में खेलना उनके लिए भावनात्मक अनुभव होता है।
दिलप्रीत बाजवा का जन्म गुरदासपुर में हुआ था। वे 2020 में कनाडा चले गए थे। छह साल बाद वे कनाडा टीम के कप्तान के रूप में भारत लौट रहे हैं। पंजाब में एज-ग्रुप क्रिकेट में उन्होंने खूब रन बनाए, लेकिन उन्हें वे मौके नहीं मिले जिनकी उन्हें उम्मीद थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कम प्रतिस्पर्धी माहौल में अपनी क्रिकेट यात्रा जारी रखी। कनाडा ग्लोबल T20 लीग में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिली और फिर उनका सफर तेजी से आगे बढ़ा। 23 साल के बाजवा 2024 T20 वर्ल्ड कप में कनाडा की ओर से खेले थे। अब, दो साल बाद, वे अपने जन्म के देश में एक ICC टूर्नामेंट खेल रहे हैं, जो उनके लिए गर्व और भावनाओं से भरा पल है।
जतिंदर सिंह का जन्म लुधियाना में हुआ था। दिलप्रीत बाजवा की तरह उन्हें भी अपने अपनाए हुए देश की क्रिकेट टीम की कप्तानी करने का मौका मिला है। 36 साल के जतिंदर सिंह पिछले 10 साल से ज़्यादा समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं और इस समय वे ओमान की राष्ट्रीय टीम के कप्तान हैं। इसके बावजूद, उन्हें अब तक भारत में खेलने का अवसर नहीं मिला है। हालांकि, इस बार भी उनका यह सपना पूरा होता नहीं दिख रहा। वजह यह है कि ओमान टीम के सभी लीग मैच श्रीलंका में खेले जाने हैं। ऐसे में जतिंदर सिंह के लिए अपने जन्म देश भारत में अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने की संभावना बहुत कम है। फिर भी, एक विदेशी टीम की कप्तानी तक पहुंचना जतिंदर सिंह की मेहनत और लंबे संघर्ष का बड़ा सबूत माना जा रहा है।