इस फिटनेस टेस्ट पर गावस्कर ने जताई नाराजगी, टीम इंडिया के खिलाड़ियों को लेकर कही ये बात

BCCI खिलाड़ियों की फिटनेस आंकने के लिए ब्रॉन्को टेस्ट लागू करने जा रही है। यह टेस्ट एथलीटों की एरोबिक फिटनेस मापने के लिए बनाया गया है। क्रिकेट में यह नया है, लेकिन रग्बी में इसे लंबे समय से एक कठिन टेस्ट के रूप में अपनाया जाता रहा है

अपडेटेड Sep 10, 2025 पर 5:56 PM
दिग्गज सुनील गावस्कर ने भी इस टेस्ट को लेकर अपनी राय सामने रखी है

Sunil Gavaskar: बीते कुछ सालों में वर्ल्ड क्रिकेट में भारतीय टीम ने फिटनेस का एक अलग ही पैमाना तय किया है। टीम इंडिया में खेलने के लिए खिलाड़ियों को एक कठिन फिटनेस टेस्ट से गुजरना पड़ता है। वहीं अब BCCI ने खिलाड़ियों की फिटनेस को और बेहतर करने की उम्मीद में ब्रॉन्को टेस्ट शुरू किया है। इस टेस्ट को लेकर अलग-अलग रिएक्शन सामने आए हैं। कुछ बड़े खिलाड़ियों का मानना है कि ऐसे टेस्ट से चोट का खतरा बढ़ सकता है। दिग्गज सुनील गावस्कर ने भी इस टेस्ट को लेकर अपनी राय सामने रखी है।

सुनील गावस्कर ने कही ये बात

भारत के पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने ब्रोंको टेस्ट के आधार पर खिलाड़ियों का चयन करना गलत बताया है। स्पोर्टस्टार में अपने कॉलम में उन्होंने लिखा, “खिलाड़ियों को यह समझने के लिए कि उन्हें शरीर के किस हिस्से को मजबूत करने की जरूरत है, ऐसे टेस्ट करवाना ठीक है। लेकिन नेशनल टीम में चयन का फैसला इन्हीं के आधार पर करना थोड़ा ज़्यादा है।” उन्होंने कहा, “हर खिलाड़ी का शरीर अलग होता है, इसलिए सभी पर एक जैसा फिटनेस नियम लागू करना मुश्किल है। चयन में खिलाड़ी की भूमिका और उसकी जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए। जैसे एक विकेटकीपर पूरे दिन लगातार सक्रिय रहता है, तो उसकी फिटनेस की मांग बाकी खिलाड़ियों से अलग होगी।”


मानसिक मजबूती ज्यादा जरूरी...

सुनील गावस्कर ने आगे कहा कि, किसी भी टेस्ट से बढ़कर खिलाड़ी की मानसिक मजबूती होती है, खासकर जब वह देश के लिए खेलने उतरे हैं। उन्होंने लिखा, “देश के लिए सबसे ऊंचे स्तर पर खेलने की असली परीक्षा को मापा नहीं जा सकता, क्योंकि यह दिमाग से जुड़ी बात है। और मेरे लिए सबसे अहम है कि जब दिल खुले, तो उसमें सिर्फ एक शब्द हो ‘भारतीय क्रिकेट’ और कुछ नहीं।”

बता दें कि BCCI, खिलाड़ियों की फिटनेस आंकने के लिए ब्रॉन्को टेस्ट लागू करने जा रही है। यह टेस्ट एथलीटों की एरोबिक फिटनेस मापने के लिए बनाया गया है। क्रिकेट में यह नया है, लेकिन रग्बी में इसे लंबे समय से एक कठिन टेस्ट के रूप में अपनाया जाता रहा है। बीसीसीआई की इस योजना पर कई खिलाड़ी और फैन असहमति जता चुके हैं। उनका कहना है कि इतने कठिन टेस्ट क्रिकेटरों पर थोपना सही नहीं है।

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