T20 World Cup Crisis: बांग्लादेश को बड़ा झटका! ICC ने ठुकराई BCB की मांग, भारत में ही खेलने होंगे टी20 वर्ल्ड कप के मैच

T20 World Cup Crisis: इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की टी20 वर्ल्ड कप के मैच भारत से बाहर करवाने की मांग को खारिज कर दिया है। BCB को अपनी भागीदारी कन्फर्म करने के लिए 24 घंटे दिए गए हैं। अगर बांग्लादेश खेलने से मना करता है, तो ICC उनकी जगह स्कॉटलैंड की टीम को चुन लेगी

अपडेटेड Jan 21, 2026 पर 7:06 PM
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ICC ने बांग्लादेश की मांग खारिज कर दी है। अब उन्हें टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारत आना ही होगा

T20 World Cup Crisis: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में वेन्यू बदलने की बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की मांग को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने ठुकरा दिया है। ICC ने साफतौर पर कहा है कि बांग्लादेश को वर्ल्ड कप खेलने के लिए भारत आना ही होगा। बांग्लादेश को दोबारा सोचने और भारत जाने के लिए राजी होने के लिए एक दिन का समय दिया गया है। अगर वे भारत आने से मना करते हैं तो बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड की टीम टूर्नामेंट में खेलेगी।

बांग्लादेश को ग्रुप चरण के चारों मैच भारत में खेलने हैं। इनमें से पहले तीन कोलकाता में और एक मुंबई में होना है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने हालांकि अपनी सरकार के समर्थन से भारत जाने से इनकार किया है। उसने उसके मैच श्रीलंका में कराने की मांग की है।

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने सुरक्षा कारणों से भारत में टी20 वर्ल्ड कप खेलने से बांग्लादेश के इनकार का समर्थन किया है। पाक ने ICC को भेजे गए एक पत्र में बांग्लादेश के मैचों की मेजबानी करने की पेशकश की है। ICC और BCB के बीच इस मसले पर कई बार बात हो चुकी है। लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।


ICC का कहना है कि टूर्नामेंट निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा। जबकि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड अपनी सरकार के आदेश के बाद भारत अपनी टीम नहीं भेजने पर अड़ा है। पीसीबी ने इस मसले पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। पाकिस्तान के सारे मैच हाइब्रिड मॉडल के तहत श्रीलंका में होंगे।

ICC ने अपने बयान में कहा, "भारत में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप के दौरान बांग्लादेश के मैच तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे। सिक्योरिटी असेसमेंट और इंडिपेंडेंट रिव्यू से पता चलता है कि भारत में बांग्लादेशी खिलाड़ियों, मीडिया, अधिकारियों और फैन्स को कोई खतरा नहीं है।"

इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक लॉ स्टूडेंट को आगामी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की भागीदारी को रोकने के उद्देश्य से जनहित याचिका (PIL) दायर करने के लिए फटकार लगाई। याचिका में छात्रा ने बांग्लादेश की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी के खिलाफ अत्याचार के कारण वहां की टीम को खेलने की इजाजत न दिए जाने का अनुरोध किया था।

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि ICC बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति तभी दे, जब यह पुष्टि हो जाए कि देश किसी भी मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं कर रहा है।

सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने याचिका के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया। उन्होंने याचिकाकर्ता की वकील देवयानी सिंह से पूछा, "यह किस तरह की याचिका है? जो भी विचार आपके मन में आता है। वही, रिट याचिका का विषय बन जाता है?"

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अदालत ने याचिकाकर्ता को अपना समय और अदालत के संसाधनों को बर्बाद करने के बजाय रचनात्मक कार्य करने और कुछ अच्छे मुद्दे उठाने के लिए कहा। अदालत ने कहा, "आप कानून की छात्रा हैं। यह सब क्या है? जरा सोचिए। इस तरह की याचिकाएं दायर करके आप अदालत का समय बेवजह बर्बाद कर रही हैं। समय बर्बाद करने के बजाय कुछ रचनात्मक काम कीजिए। अगर आप जिद करती हैं, तो हम आप पर भारी जुर्माना लगा देंगे।" इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

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