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Norway Chess 2026: प्रज्ञाननंदा ने नॉर्वे शतरंज में वर्ल्ड नंबर 1 खिलाड़ी कार्लसन को दूसरी बार दी मात, हारने के बाद मैग्नस का अजीबोगरीब रिएक्शन वायरल

Norway Chess 2026: 27 मई को तीसरे राउंड में सफेद मोहरों से नॉर्वे के दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराने के बाद, चेन्नई के 20 वर्षीय खिलाड़ी भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञाननंदा ने काले मोहरों से भी वही कारनामा दोहराकर शानदार जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Jun 03, 2026 पर 12:06 PM
Norway Chess 2026: प्रज्ञाननंदा ने नॉर्वे शतरंज में वर्ल्ड नंबर 1 खिलाड़ी कार्लसन को दूसरी बार दी मात, हारने के बाद मैग्नस का अजीबोगरीब रिएक्शन वायरल
Norway Chess 2026: प्रज्ञाननंदा ने इसी टूर्नामेंट के 2024 संस्करण में भी कार्लसन को हराया था

Norway Chess 2026: भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञाननंदा ने नॉर्वे के दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन के खिलाफ अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए शतरंज टूर्नामेंट में उन्हें दूसरी बार हराकर इतिहास रच दिया है। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में पहले भारतीय चैंपियन बनने की अपनी दावेदारी को मजबूत किया। वहीं, विश्व चैंपियन डी गुकेश की खिताब जीतने की उम्मीदें आठवें दौर में फ्रांसीसी ग्रैंडमास्टर अलीरेजा फिरोजा से एक और करारी हार के बाद खत्म हो गईं। वह आठ अंकों के साथ तालिका में सबसे निचले पायदान पर आ गए हैं।

इस तरह से गुकेश का 2024 में विश्व चैंपियन बनने के बाद खराब प्रदर्शन जारी है। प्रज्ञाननंदा इस साल क्लासिकल बाजी में कार्लसन को दो बार हराने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इस एलीट डबल राउंड-रॉबिन प्रतियोगिता में उन्होंने पहले भी कार्लसन को क्लासिकल बाजी में हराया था। इस जीत से 20 वर्षीय प्रज्ञाननंदा के 12 अंक हो गए। साथ ही वह तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। दूसरी तरफ इस हार से कार्लसन की आठवीं बार नॉर्वे शतरंज खिताब जीतने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है।

कार्लसन के लिए खिताब बचाना आसान नहीं

अब केवल दो राउंड का खेल बचा हुआ है। ऐसे में मौजूदा चैंपियन कार्लसन के लिए खिताब बचाना आसान नहीं होगा। कार्लसन का यह अभियान अप्रत्याशित रूप से उथल-पुथल भरा रहा है, जिसमें उन्हें चार बार क्लासिकल बाजी में हार का सामना करना पड़ा। इनमें से दो बार उन्हें प्रज्ञाननंदा ने हराया। इस तरह से वह विश्व के नंबर एक खिलाड़ी के वर्चस्व को चुनौती देने वाले प्रमुख खिलाड़ी बन गए हैं।

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