टेक्नोलॉजी सेक्टर बड़े बदलाव से गुजर रहा है। सिर्फ 2025 की पहली छमाही में दुनिया में टेक्नोलॉजी सेक्टर में 94,000 लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं। छंटनी करने वालों में माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और सेल्सफोर्स जैसी कंपनियां शामिल हैं। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि रोजाना 507 लोगों की नौकरी जा रही है। दरअसल, कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को ध्यान में रख अपने बिजनेस को रीस्ट्रक्चर रही हैं।
AI के असर पर एग्जूक्यूटिव्स की अलग-अलग राय
यह माना जा रहा है कि आर्टफिशियल इंटेलिजेंस का रोजगार के मौकों पर खराब असर पड़ रहा है। हालांकि, इस बारे में एक राय नहीं है। Amazon के सीईओ एंडी जैसे कुछ एग्जिक्यूटिव्स का मानना है कि आने वाले समय में AI के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों की संख्या में कमी आएगी। हालांकि, कुछ एग्जिक्यूटिव्स का मानना है कि एंप्लॉयज की छंटनी में एआई का हाथ नहीं है। कई कंपनियों के सीईओ का कहना है कि छंटनी की वजह एंप्लॉजी की रीस्किलिंग, आर्थिक अनिश्चितता और कोविड के बाद ज्यादा हायरिंग का समापन है।
टीसीएस ने छंटनी की दूसरी वजह बताई
टीसीएस ने हाल में 12,000 एंप्लॉयीज को नौकरी से हटाने का प्लान बनाया है। यह कंपनी के कुल एंप्लॉयीज की संख्या का 2 फीसदी है। टीसीएस में 6.13 लाख एंप्लॉयीज काम करते हैं। कई लोग टीसीएस में इस छंटनी की वजह AI को मान रहे हैं। लेकिन, कंपनी ने इसका खंडन किया है। टीसीएस के सीईओ के कृत्तिवासन ने कहा कि एआई के इस्तेमाल से प्रोडक्टविटी 20 फीसदी बढ़ी है। लेकिन, यह छंटनी की वजह नहीं है। छंटनी की असल वजह स्किल मिसमैच है।
माईक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी कर रही छंटनी
माइक्रोसॉफ्ट ने तीसरे चरण की छंटनी में 15,000 नौकरियां खत्म की है। कंपनी ने कहा है कि एआई के इस्तेमाल में सबसे आगे रहने के नाते उसे बदलती स्थिति के हिसाब से खुद में बदलवा करना पड़ रहा है। कंपनी के सीईओ सत्य नाडेला ने कहा कि यह पूरी इंडस्ट्री के लिए पुरानी चीजों को भूलने और नई चीजों को अपनाने की प्रक्रिया है। हाल में इंटेल ने करीब 24,000 एंप्लॉयीज को हटाने का ऐलान किया। उसने कहा है कि वह खुद को ज्यादा सक्षम बनाना चाहती है।