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Starlink की तकनीक से खत्म होगा टावर का झंझट, सैटेलाइट से सीधे फोन होगा कनेक्ट

Direct-to-Cell Satellite Service: एलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने अपनी डायरेक्ट टू सेल टेक्नोलॉजी की सफल टेस्टिंग की है। दावा है कि इस टेक्नोलॉजी की मदद से फोन में सिग्नल सीधे सैटेलाइट से आएंगे। यानी अब मोबाइल टावर की कोई जरूरत ही नहीं होगी।

Edited By: Ashwani Kumar Srivastavaअपडेटेड Aug 14, 2025 पर 10:15 AM
Starlink की तकनीक से खत्म होगा टावर का झंझट, सैटेलाइट से सीधे फोन होगा कनेक्ट
Starlink की तकनीक से खत्म होगा टावर का झंझट

Direct-to-Cell Satellite Service : एलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक ने अपनी डायरेक्ट टू सेल टेक्नोलॉजी की सफल टेस्टिंग की है। दावा है कि इस टेक्नोलॉजी की मदद से फोन में सिग्नल सीधे सैटेलाइट से आएंगे। यानी अब मोबाइल टावर की कोई जरूरत ही नहीं होगी। बता दें कि इस टेक्नोलॉजी पर स्टारलिंक लंबे समय से काम कर रही है। अब जाकर इसकी टेस्टिंग सफल हो पाई है। चलिए डिटेल में जानते हैं कि इस टेक्नोलॉजी से क्या-क्या फायदे होंगे।

यूक्रेन की कंपनी का बयान

यूक्रेन की सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी Kyivstar ने मंगलवार को कहा कि उसने पूर्वी यूरोप में मस्क की स्टारलिंक डायरेक्ट-टू-सेल सैटेलाइट तकनीक का पहला फील्ड परीक्षण सफलतापूर्वक किया है। Kyivstar ने बताया कि यह पायलट परीक्षण जाइटॉमिर (Zhytomyr) क्षेत्र में स्टारलिंक की डायरेक्ट-टू-सेल तकनीक का उपयोग करके किया गया, जहां इसके CEO ओलेक्सांद्र कोमारोव और यूक्रेन के डिजिटल परिवर्तन मंत्री मिखाइलो फेडोरोव ने स्मार्टफोन के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान किया।

क्या है डायरेक्ट टू सेल टेक्नोलॉजी?

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