यह कहानी भारत के आखिरी छोर कहे जाने वाले धनुषकोडी की है, जिसे आज भी "भूतों का गांव" कहा जाता है। 1964 के भयंकर साइक्लोन के बाद यह इलाका पूरी तरह उजड़ गया था। कभी यह एक चहल-पहल वाला शहर हुआ करता था, लेकिन एक रात आई नेचुरल डिजास्टर ने इसकी पहचान ही बदल दी। आज यहां मौजूद खंडहर उस भयावह त्रासदी की खामोश गवाही देते हैं। आइये जानते है इसके बारे में और भी कुछ अनकही बातें:
