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एक झटके में उजड़ गया पूरा शहर, आज भी वीरान पड़ा है भारत का यह आखिरी छोर!

भारत के साउथर्न टिप पर बसा एक रहस्यमयी और वीरान जगह है, जिसे आज "भूतों का गांव" कहा जाता है। 22 दिसंबर 1964 को आए भयंकर साइक्लोन ने इस धनुषकोडी शहर को तबाह कर दिया, जिसमें करीब 1,800 लोगों की जान चली गई थी। इस डिजास्टर के बाद गवर्नमेंट ने धनुषकोडी को रहने के लायक नहीं है कह दिया और ज्यादातर लोग इस जगह को छोड़कर चले गए। आज भी यहां के खंडहर, सुनसान सड़कें और उजड़ी इमारतें उस दर्दनाक त्रासदी की कहानी बयां करती हैं।

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 08, 2026 पर 12:05 PM
एक झटके में उजड़ गया पूरा शहर, आज भी वीरान पड़ा है भारत का यह आखिरी छोर!

यह कहानी भारत के आखिरी छोर कहे जाने वाले धनुषकोडी की है, जिसे आज भी "भूतों का गांव" कहा जाता है। 1964 के भयंकर साइक्लोन के बाद यह इलाका पूरी तरह उजड़ गया था। कभी यह एक चहल-पहल वाला शहर हुआ करता था, लेकिन एक रात आई नेचुरल डिजास्टर ने इसकी पहचान ही बदल दी। आज यहां मौजूद खंडहर उस भयावह त्रासदी की खामोश गवाही देते हैं। आइये जानते है इसके बारे में और भी कुछ अनकही बातें:

भारत का आखिरी छोर माना जाता है

धनुषकोडी, तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी सिरे पर बसा है। यह भारत और श्रीलंका के बीच सबसे पास की जगहों में से एक माना जाता है। एक समय यह एक बस्टलिंग टाउन था, जहां रेलवे स्टेशन, पोस्ट ऑफिस, चर्च, स्कूल और मार्केट मौजूद थे।

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