हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का काफी महत्व होता है। इस साल देश भर में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे और माता पार्वती के साथ उनका दिव्य विवाह भी इसी तिथि से जुड़ा माना जाता है। महाशिवरात्रि के मौके पर पूरे देश में भक्त भगवान शिव की पूजा की तैयारी कर रहे हैं। भारत में कई प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं, लेकिन कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जो अपनी खासियत के कारण अलग पहचान रखते हैं।
उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में 12 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए चोपता से पैदल ट्रेक करना पड़ता है। चारों तरफ बर्फ से ढकी पहाड़ियां और शांत वातावरण इस मंदिर को बेहद खास बनाते हैं। यहां का सुकून भरा माहौल भक्तों को गहरी शांति का अनुभव कराता है, जैसा वे खासतौर पर महाशिवरात्रि के अवसर पर महसूस करना चाहते हैं।
भोजेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश का भोजेश्वर मंदिर अपने विशाल शिवलिंग के लिए जाना जाता है। 11वीं सदी में राजा भोज ने इसका निर्माण शुरू कराया था, लेकिन मंदिर पूरा नहीं बन सका। फिर भी इसकी भव्य पत्थर की संरचना इसे बेहद खास बनाती है।
उत्तराखंड में देवदार के जंगलों के बीच बसा जागेश्वर धाम 100 से अधिक पुराने मंदिरों का समूह है। यहां का शांत वातावरण भक्तों को ध्यान और आध्यात्मिक अनुभव देता है।
पाताल भुवनेश्वर, उत्तराखंड
पाताल भुवनेश्वर भी उत्तराखंड में स्थित एक गुफा मंदिर है। यहां जमीन के नीचे चूना पत्थर की गुफाओं में प्राकृतिक आकृतियां हैं, जिन्हें देवताओं से जोड़ा जाता है। यहां तक पहुंचने के लिए संकरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। गुफा के भीतर एक खास शिवलिंग है, जिसके बारे में स्थानीय लोगों का विश्वास है कि वह हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ रहा है। यहां तक कहा जाता है कि जिस दिन यह शिवलिंग गुफा की छत को छू लेगा, उस दिन दुनिया का अंत हो जाएगा।
खजुराहो का मतंगेश्वर मंदिर भी बहुत प्राचीन है। यहां करीब 8 फीट ऊंचा शिवलिंग है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसकी ऊंचाई हर साल थोड़ी बढ़ती है।
भूतेश्वर महादेव, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के जंगलों में स्थित भूतेश्वर महादेव को प्राकृतिक रूप से बना बहुत बड़ा शिवलिंग माना जाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है। ये सभी मंदिर अपनी अनोखी विशेषताओं और गहरी आस्था के कारण खास महत्व रखते हैं।