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लाल रेत, ताड़ के पेड़ और मीठे पानी के फव्वारे... तमिलनाडु के इस 'Red Desert' की खूबसूरती देख आप भी कहेंगे 'वॉव'!

तमिलनाडु के थूथुकुडी में स्थित 'थेरी काडू' दक्षिण भारत का एकमात्र लाल रेगिस्तान है, जो अपने 1 लाख साल पुराने इतिहास और आयरन ऑक्साइड से बनी सुर्ख लाल रेत के लिए प्रसिद्ध है।

MoneyControl Newsअपडेटेड May 07, 2026 पर 7:21 PM
लाल रेत, ताड़ के पेड़ और मीठे पानी के फव्वारे... तमिलनाडु के इस 'Red Desert' की खूबसूरती देख आप भी कहेंगे 'वॉव'!

जब हम रेगिस्तान का नाम लेते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले राजस्थान के सुनहरे टीले आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सुदूर दक्षिण में, तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में एक ऐसा रेगिस्तान छिपा है जो सुनहरा नहीं बल्कि सुर्ख लाल है? 'थेरी काडू' (Theri Kaadu) के नाम से मशहूर यह इलाका न केवल अपनी खूबसूरती बल्कि अपने 1,00,000 साल पुराने भूगर्भीय इतिहास के लिए भी दुनिया भर के पर्यटकों और वैज्ञानिकों को हैरान कर रहा है।

कुदरत का लाल कैनवास

थूथुकुडी और तिरुनेलवेली जिलों में फैला यह 'लाल रेगिस्तान' लगभग 12,000 एकड़ में फैला हुआ है। यहां की रेत का गहरा लाल रंग किसी चित्रकार की कल्पना जैसा लगता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस रेत में आयरन ऑक्साइड (लौह अयस्क) की मात्रा बहुत अधिक है, जिसके कारण इसे यह अनोखा रंग मिला है। हवाओं के थपेड़ों ने सदियों से यहाँ रेत के ऊंचे-ऊंचे टीले बनाए हैं, जो समय के साथ अपनी जगह बदलते रहते हैं।

रेगिस्तान में जीवन की हरियाली

आमतौर पर रेगिस्तान सूखे और बेजान होते हैं, लेकिन थेरी काडू की कहानी अलग है। यह रेगिस्तान होने के बावजूद यहां मीठे पानी के झरने पाए जाते हैं। यही कारण है कि यहां का पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) काफी समृद्ध है। यहां ताड़ के पेड़ों की बहुतायत है और कई दुर्लभ वन्यजीव भी देखने को मिलते हैं। हालांकि, यहाँ खेती करना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि पानी बहुत जल्दी सोख लिया जाता है। स्थानीय किसान यहाँ धान जैसी फसलें तो नहीं उगा सकते, लेकिन उन्होंने प्रकृति के साथ तालमेल बिठाते हुए यहाँ के स्वदेशी पेड़ों और ताड़ की खेती को अपना लिया है।

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