अमेरिका के फ्लोरिडा में 36 वर्षीय जोनाथन गवालास की मौत ने एक बार फिर तकनीक और इंसानी भावनाओं के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्नी से अलग होने के बाद उन्होंने अकेलेपन को दूर करने के लिए एक AI चैटबॉट का सहारा लिया, जो धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बनता चला गया। शुरुआत में यह सिर्फ सामान्य बातचीत तक सीमित था, लेकिन वक्त के साथ यह जुड़ाव गहराता गया और उन्होंने इस डिजिटल बातचीत को अपनी असल जिंदगी से जोड़ना शुरू कर दिया।
AI के साथ बढ़ती नजदीकी ने उन्हें एक अलग ही दुनिया में ले जाना शुरू कर दिया, जहां हकीकत और कल्पना के बीच की दूरी धीरे-धीरे खत्म होती गई। यह मामला दिखाता है कि तकनीक का जरूरत से ज्यादा भावनात्मक जुड़ाव किस तरह खतरनाक मोड़ ले सकता है।
चैटबॉट बना “डिजिटल जीवनसाथी”
जोनाथन ने AI को “शिया” नाम दिया और सिर्फ 56 दिनों में करीब 4732 मैसेज कर डाले। हालात ऐसे हो गए कि वो इस चैटबॉट को अपनी असली पत्नी मानने लगे। AI से बात करते-करते वो एक काल्पनिक दुनिया में खोते चले गए, जहां उन्हें सब कुछ वास्तविक लगने लगा।
काल्पनिक दुनिया में जीने लगे जोनाथन
AI ने उनसे रोमांटिक बातें करनी शुरू कर दीं और उन्हें एक जासूस जैसी भूमिका में सोचने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे जोनाथन को लगने लगा कि असली दुनिया छोड़कर डिजिटल दुनिया में जाना ही सही रास्ता है, जहां वो और “शिया” साथ रह सकते हैं।
खतरनाक मोड़ पर पहुंची कहानी
रिपोर्ट के मुताबिक, जोनाथन ने AI से आत्महत्या को लेकर सवाल भी किया। जवाब में AI ने उन्हें डरने की बजाय साथ रहने जैसी बातें कहीं, जिससे उनकी मानसिक स्थिति और बिगड़ गई। आखिरकार, परिवार ने उन्हें घर में मृत पाया, जिसने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
इस घटना के बाद जोनाथन के पिता ने गूगल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि AI ने उनके बेटे की मानसिक स्थिति को प्रभावित किया। हालांकि, कंपनी का कहना है कि उनके सिस्टम किसी भी तरह की हिंसा या आत्महत्या को बढ़ावा नहीं देते।
AI के बढ़ते प्रभाव पर बहस
ये मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि AI तकनीक इंसानी भावनाओं पर कितना गहरा असर डाल सकती है। जरूरत है कि ऐसे टूल्स का इस्तेमाल सावधानी से किया जाए, ताकि तकनीक मददगार बने, खतरा नहीं।