अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट में साल 2025 के अनुमानित आंकड़ों के आधार पर दुनिया के सबसे गरीब देशों की सूची जारी की गई है। यह सूची “नॉमिनल जीडीपी प्रति व्यक्ति” के आधार पर तैयार की गई है, जिससे यह पता चलता है कि किसी देश के लोगों की औसत आय कितनी है और उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है। यह रैंकिंग सिर्फ आंकड़े नहीं दिखाती, बल्कि उन देशों की वास्तविक स्थिति भी सामने लाती है, जहां लोगों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में संघर्ष करना पड़ता है।
कम आय, सीमित संसाधन और रोजगार के कम अवसर इन देशों की बड़ी चुनौतियां हैं। इस रिपोर्ट के जरिए यह समझना आसान हो जाता है कि किन देशों को विकास और बेहतर जीवन स्तर के लिए सबसे ज्यादा मदद और प्रयासों की जरूरत है।
इस सूची में सबसे पहला नाम दक्षिण सूडान का है, जहां प्रति व्यक्ति आय महज 251 डॉलर के आसपास है। इसके बाद यमन दूसरे स्थान पर है, जहां यह आंकड़ा करीब 417 डॉलर है। लंबे समय से जारी संघर्ष ने यमन की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है।
तीसरे नंबर पर बुरुंडी (लगभग 490 डॉलर) और चौथे स्थान पर सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (करीब 532 डॉलर) शामिल हैं, जहां आर्थिक चुनौतियां अब भी गहराई से जमी हुई हैं।
पांचवें स्थान पर भी मुश्किलें कायम
पांचवें स्थान पर मलावी का नाम आता है, जहां प्रति व्यक्ति आय करीब 580 डॉलर है। हालांकि यह अन्य देशों से थोड़ा बेहतर दिखता है, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह अब भी बेहद कम माना जाता है।
इस सूची में शामिल अधिकतर देश अफ्रीका महाद्वीप से हैं। इन देशों में गरीबी के पीछे मुख्य वजहें हैं—लगातार युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और सीमित रोजगार के अवसर। यही कारण है कि वहां के लोगों के लिए बेहतर जीवन स्तर हासिल करना चुनौती बना हुआ है।
GDP और PPP में क्या फर्क?
ये समझना भी जरूरी है कि “नॉमिनल जीडीपी प्रति व्यक्ति” के अलावा “पर्चेजिंग पावर पैरिटी (PPP)” भी एक अहम मापदंड है। PPP में स्थानीय कीमतों और जीवनयापन की लागत को शामिल किया जाता है, जिससे तस्वीर थोड़ी बदल सकती है। बावजूद इसके, कई देश गरीबी की इस सूची में नीचे ही बने रहते हैं।
ये रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उन देशों की जमीनी हकीकत को दिखाती है जहां लोग आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।