बेंगलुरु में घर लौटने के लिए कैब या बाइक टैक्सी का इंतजार करना एक शख्स को भारी पड़ गया। करीब दो घंटे तक Rapido, ऑटो और कैब बुक करने की कोशिश के बाद भी जब कोई सवारी नहीं मिली, तो उसने आखिरकार बस से जाने का फैसला किया। इसके लिए उसे सिर्फ ₹12 खर्च करने पड़े। लेकिन असली कहानी किराए की नहीं, उस सफर के दौरान लौट आई पुरानी यादों की है। बस में बैठते ही उसे स्कूल और कॉलेज के दिन याद आने लगे दोस्तों के साथ बस स्टॉप पर इंतजार करना, खिड़की वाली सीट के लिए लड़ना और कंडक्टर से छोटी-मोटी बहस तक।
