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550 साल पुराने इस मंदिर में पानी नहीं, इस्तेमाल हुआ था 40 हजार किलो घी! वजह कर देगी हैरान

राजस्थान के बीकानेर में स्थित भांडासर जैन मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और रहस्यमयी कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। करीब 550 साल पुराने इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसके निर्माण में पानी की जगह हजारों किलो घी का इस्तेमाल किया गया था। यही खासियत इसे देश की सबसे चर्चित ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल करती है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Jul 26, 2026 पर 9:51 AM
550 साल पुराने इस मंदिर में पानी नहीं, इस्तेमाल हुआ था 40 हजार किलो घी! वजह कर देगी हैरान
मंदिर का निर्माण वर्ष 1468 में जैन व्यापारी भांडासा ओसवाल के संरक्षण में शुरू हुआ था।

राजस्थान के बीकानेर में मौजूद भांडासर जैन मंदिर अपनी अनोखी कहानी और शानदार स्थापत्य कला के लिए मशहूर है। करीब 550 साल पुराने इस मंदिर से जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं हैं, जो इसे देश की अन्य धरोहरों से अलग बनाती हैं। कहा जाता है कि इसके निर्माण में पानी की जगह हजारों किलो घी का इस्तेमाल किया गया था। यही वजह है कि यह मंदिर इतिहास, आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम माना जाता है। इसकी खूबसूरत नक्काशी, रंगीन चित्रकारी और प्राचीन वास्तुकला देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं।

हालांकि घी से निर्माण की कहानी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन यही लोककथा इस मंदिर को और भी खास बना देती है। सदियों बाद भी यह मंदिर अपनी अनोखी पहचान और आकर्षक विरासत के कारण लोगों को हैरान करता है।

पानी की कमी ने बदली निर्माण की कहानी

मंदिर का निर्माण वर्ष 1468 में जैन व्यापारी भांडासा ओसवाल के संरक्षण में शुरू हुआ था। उस समय बीकानेर क्षेत्र में पानी की भारी कमी थी। स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इसी समस्या के कारण मंदिर के गारे (मोर्टार) में पानी की जगह घी का उपयोग किया गया, जिसने इस मंदिर को बाकी धरोहरों से अलग पहचान दिलाई।

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