रामगढ़ की सुबह इन दिनों सिर्फ सूरज की पहली किरणों से नहीं, बल्कि उन महिलाओं के हौसले से भी रोशन होती है, जो अपने सपनों के लिए मैदान में पसीना बहा रही हैं। इन्हीं में 32 वर्षीय कविता कुमारी की कहानी सबसे अलग नजर आती है। दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली कविता विधवा हैं और दो बच्चों की मां भी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य चुना है, जो उनकी जिंदगी बदल सकता है। हर सुबह घर के जरूरी काम निपटाने के बाद कविता करीब 8 किलोमीटर दूर रामगढ़ के सिदो-कान्हू मैदान पहुंचती हैं। उनके पास महंगे रनिंग शूज, ट्रैकसूट या स्पोर्ट्स टी-शर्ट नहीं हैं।
