मध्य प्रदेश के सागर जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित खिमलासा ग्राम पंचायत के एक प्रगतिशील किसान, अमित जैन, आज आधुनिक कृषि के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। अमित पिछले 5 वर्षों से पारंपरिक फसलों के बजाय एग्जॉटिक वेजिटेबल्स (विदेशी सब्जियों) की खेती कर रहे हैं। अपनी मेहनत और सूझबूझ से वे हर सीजन लगभग 15 से 20 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे एक छोटे से गांव में उत्पादन करके अपने माल की सीधी सप्लाई दिल्ली की मशहूर आजादपुर मंडी में करते हैं, जहां वे प्रतिदिन 5 क्विंटल तक सब्जियां भेज देते हैं।
पिता की विरासत और नवाचार का मेल
अमित जैन बताते हैं कि उनके पिता को खेती में नए-नए प्रयोग करने और नवाचार करने का गहरा शौक था। पिता के आकस्मिक निधन के बाद अमित ने उनकी इसी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। करीब 5 साल पहले उन्होंने प्रायोगिक तौर पर विदेशी सब्जियों की खेती शुरू की थी। शुरुआत में उन्होंने इसे बहुत छोटे स्तर पर आजमाया, लेकिन जब उन्हें बेहतर मुनाफा और मार्केटिंग की समझ मिली, तो उन्होंने बड़े स्तर पर काम शुरू किया। आज वे लगभग 5 से 7 एकड़ भूमि पर सात अलग-अलग प्रकार की विदेशी सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।
अमित के खेतों में मुख्य रूप से सात ऐसी विदेशी फसलें उगाई जाती हैं जिनकी बाजार में 12 महीने भारी डिमांड रहती है। इनमें शामिल हैं:
* स्प्राउट्स (Brussels Sprouts)
* रेड लेट्यूस (Red Lettuce)
* चाइनीज कैबेज (Chinese Cabage) वे साल भर में तीन सीजन इन फसलों की खेती करते हैं। केवल भीषण गर्मी वाले महीनों (मई और जून) को छोड़कर, बाकी पूरे साल वे रोटेशन पद्धति से फसलों का उत्पादन करते रहते हैं।
गर्मी के मौसम में भी फसल को सुरक्षित रखने के लिए अमित ने अपने खेतों में 'कवर क्रॉपिंग' की व्यवस्था की है। फसलों के ऊपर विशेष कवर लगाने से भीषण लू और तेज धूप का पौधों पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। इसके अलावा, वे खेती के लिए आधुनिक 'बेड पद्धति' का पालन करते हैं।
* मल्चिंग और ड्रिप: खेती में पानी की बचत और खरपतवार नियंत्रण के लिए मल्चिंग फिल्म और ड्रिप सिंचाई का उपयोग अनिवार्य है।
* फर्टिगेशन: पौधों को दिए जाने वाले उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव भी ड्रिप सिस्टम के माध्यम से ही किया जाता है, जिससे लागत कम होती है और पौधों को सटीक पोषण मिलता है।
अमित जैन के अनुसार, विदेशी सब्जियों की खेती आर्थिक रूप से बेहद लाभकारी है।
* लागत: एक एकड़ में बीज से लेकर सप्लाई तक का कुल खर्च लगभग 1 लाख रुपये आता है।
* कमाई: औसतन एक एकड़ की फसल 4 से 5 लाख रुपये में बिकती है।
* शुद्ध लाभ: इस प्रकार किसान को एक एकड़ से लगभग 4 लाख रुपये का मुनाफा होता है। 5 एकड़ की खेती करने पर एक ही सीजन में 20 लाख रुपये तक की कमाई आसानी से की जा सकती है।
गुणवत्तापूर्ण बीज का महत्व
अमित का मानना है कि इस प्रकार की उच्च-मूल्य वाली खेती में तकनीक के साथ-साथ बीज का चयन सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। वे बीज की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करते। इन विदेशी फसलों के बीज इंग्लैंड, जर्मनी और चीन जैसे देशों से इंपोर्ट होकर दिल्ली पहुंचते हैं, जहां से अमित इन्हें विशेष तौर पर अपने गांव मंगवाते हैं। उनका संदेश है कि यदि किसान सही तकनीक अपनाए, अच्छे बीजों का चुनाव करे और कड़ी मेहनत करे, तो खेती से बेहतरीन कमाई संभव है।
रिपोर्ट- लोकल 18 (अनुज गौतम)