आज की कॉर्पोरेट दुनिया सिर्फ सैलरी तक सीमित नहीं रह गई है। बड़े ऑफिस अब कर्मचारियों को आकर्षित करने और उन्हें आरामदायक माहौल देने के लिए कई सुविधाएं देते हैं। सुबह की कैब, फ्री कॉफी, स्नैक्स, गेमिंग जोन, जिम और ऑफिस में मिलने वाली छोटी-छोटी चीजें कर्मचारियों की रोजमर्रा की लाइफ का हिस्सा बन चुकी हैं। लेकिन ज्यादातर लोग कभी इस बात पर ध्यान नहीं देते कि इन सुविधाओं पर कंपनी हर महीने कितना खर्च करती होगी। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने इसी “हिडन कॉर्पोरेट खर्च” को चर्चा का विषय बना दिया।
वीडियो देखने के बाद कई लोग हैरान रह गए कि सैलरी के अलावा भी कंपनियां कर्मचारियों पर हजारों रुपये खर्च करती हैं। इंटरनेट पर अब लोग इस पर मजेदार रिएक्शन देने के साथ-साथ कॉर्पोरेट कल्चर को लेकर बहस भी कर रहे हैं।
सैलरी से अलग कंपनी मुझ पर इतना खर्च करती है
गौरव धमा नाम के एक प्रोफेशनल ने अपने ऑफिस की रोजमर्रा की सुविधाओं का पूरा हिसाब शेयर किया। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी सिर्फ सैलरी ही नहीं, बल्कि रोज मिलने वाली छोटी-छोटी सुविधाओं पर भी हजारों रुपये खर्च करती है। जब उन्होंने पूरे महीने का आंकड़ा निकाला तो रकम करीब 81 हजार रुपये तक पहुंच गई।
कैब से लेकर कॉफी तक, हर चीज का जोड़ा खर्च
वीडियो में गौरव ने सुबह की कैब राइड, नाश्ता, जिम, कॉफी, स्नैक्स, लंच और शाम की कैब जैसी सुविधाओं का खर्च बताया। उनके अनुसार रोजाना सिर्फ इन चीजों पर लगभग 3700 रुपये खर्च होते हैं। इसमें ऑफिस गेम्स, ड्राई फ्रूट्स और स्टेशनरी जैसी चीजें भी शामिल थीं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए मजेदार रिएक्शन
वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट यूजर्स ने मजेदार प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने कंपनी की तारीफ की, तो कुछ ने मजाक में कहा कि अगर Work From Home मिल जाए तो ये पूरा पैसा सीधे कर्मचारियों को दे देना चाहिए।
कॉर्पोरेट लाइफ का हिडन खर्च
इस वीडियो ने लोगों को ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि कंपनियां कर्मचारियों को खुश और आरामदायक माहौल देने के लिए कितना बड़ा खर्च करती हैं। कई यूजर्स ने माना कि उन्होंने कभी इस नजरिए से ऑफिस सुविधाओं के बारे में सोचा ही नहीं था।
ऑफिस कल्चर पर फिर शुरू हुई चर्चा
वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर कॉर्पोरेट कल्चर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों का कहना है कि ऐसी सुविधाएं कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाती हैं, जबकि कुछ का मानना है कि कंपनियां इन सुविधाओं के जरिए कर्मचारियों को लंबे समय तक ऑफिस में बनाए रखना चाहती हैं।