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700 किलो तक मोटा कर सुअर को बनाया जाता है बलि का बकरा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!

Pigs of God festival: 'पिग्स ऑफ गॉड' त्योहार अक्सर विवादों में घिरा रहता है, क्योंकि इसमें सुअरों की बलि दी जाती है। यह सिर्फ बलि तक सीमित नहीं, बल्कि त्योहार के दौरान सुअरों के साथ की जाने वाली अमानवीय और बर्बर हरकतों के लिए भी बदनाम है, जिससे इसे लेकर विरोध होता रहता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 03, 2025 पर 9:54 AM
700 किलो तक मोटा कर सुअर को बनाया जाता है बलि का बकरा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!
Pigs of God festival: एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट इस क्रूर परंपरा के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं।

दुनिया में कई संस्कृतियों में जानवरों को देवता का रूप मानकर पूजा जाता है। कहीं गाय को मां माना जाता है, तो कहीं हाथी को भगवान गणेश का प्रतीक समझा जाता है। लेकिन ताइवान का एक अनोखा त्योहार "पिग्स ऑफ गॉड" यानी "ईश्वर के सुअर" इस आस्था से बिल्कुल अलग और हैरान करने वाला पहलू सामने लाता है। ये त्योहार श्रद्धा के बजाय अपनी क्रूर परंपराओं के लिए जाना जाता है। इस खास अवसर पर सैकड़ों सुअरों को पहले जबरदस्ती खिलाकर अस्वाभाविक रूप से मोटा किया जाता है और फिर उनका खुलेआम गला रेत दिया जाता है। ताइवान के हक्का समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला ये त्योहार कई बार विवादों में भी आ चुका है।

जहां कुछ लोग इसे परंपरा और धार्मिक भावना का प्रतीक मानते हैं, वहीं पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठन इसे अमानवीय और क्रूर प्रथा बताते हैं। यही वजह है कि ये त्योहार हर साल चर्चा में आ जाता है।

हक्का समुदाय की परंपरा,

ताइवान में रहने वाला हक्का समुदाय (Hakka community), जिसकी आबादी लगभग 40 लाख है, इस त्योहार को परंपरा और धार्मिक भावना से जोड़कर देखता है। इनके अनुसार, सबसे मोटे सुअर की बलि देना ईश्वर को प्रसन्न करने का तरीका है। लेकिन इस आस्था के पीछे छिपी क्रूरता की कहानी बेहद डरावनी है।

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