दीपावली, जिसे दीपोत्सव भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहार है। यह बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश और धन-समृद्धि के आगमन का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व पांच दिनों तक चलता है, जिसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, मुख्य दीवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। दीवाली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इन्हें घर-धन की वृद्धि और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
इस वर्ष दीवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। कार्तिक अमावस्या दोपहर 3:44 बजे शुरू होगी और 21 अक्टूबर शाम 5:55 बजे समाप्त होगी। चूंकि अमावस्या तिथि दो दिनों तक रहेगी, इसलिए ज्योतिषियों और विद्वानों के अनुसार 20 अक्टूबर ही दीवाली मनाना शुभ रहेगा। इस दिन शाम 5:46 बजे से लेकर रात 8:18 बजे तक प्रदोष काल रहेगा, जो पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, वृषभ लग्न का शुभ काल शाम 7:08 से रात 9:03 बजे तक रहेगा, जो पूजा के लिए दूसरा शुभ समय है।
सबसे उत्तम और प्रमुख शुभ मुहूर्त शाम 7:08 से 8:18 बजे तक रहेगा, जिसमें लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त पूजा करनी चाहिए। इस समय लगभग 1 घंटा 11 मिनट का पूजा का समय मिलता है। इस दौरान की गई पूजा से घर में खुशहाली और समृद्धि स्थायी रूप से बनी रहती है।
पूजा से पूर्व घर और पूजा स्थल की सफाई करना आवश्यक है। पूजा स्थल पूर्व दिशा या ईशान कोण में चौकी स्थापित करके लाल या गुलाबी कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति को दाहिनी ओर और माता लक्ष्मी की मूर्ति को बाईं ओर रखें। पूजा आरंभ करने से पहले संकल्प लें और जल का छिड़काव करें। घी का दीपक जलाएं, फिर फूल, मिठाई और अन्य पूजनीय सामग्री अर्पित करें। गणेश जी और माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें और आरती के साथ पूजा समाप्त करें। पूजा के बाद पांच दीपकों को एक थाली में स्थापित करके उनका पूजन करें और फिर उनकी रोशनी घर के विभिन्न हिस्सों में फैलाएं। पूजा के दौरान लाल, पीले या चमकीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
दीवाली का आध्यात्मिक महत्व
यह त्योहार पिता श्री राम के 14 वर्षों के वनवास से लौटकर अयोध्या में जन मानस द्वारा दीप जलाकर उनके स्वागत का स्मरण है। इसे प्रकाश और समृद्धि का पर्व माना जाता है, जो जीवन में अंधकार दूर कर उजाले का संचार करता है। इस वर्ष दीवाली पर महालक्ष्मी योग भी बन रहा है, जो सौ वर्षों में पहली बार हो रहा है, जिससे पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है।
इस दिवाली, शुभ मुहूर्त का पालन कर विधिपूर्वक पूजा करें और मां लक्ष्मी व भगवान गणेश का आशीर्वाद पाकर सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि प्राप्त करें। इस पावन अवसर पर अपने घर और जीवन को प्रकाशमान बनाएं।