अमेरिका से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला लोगों को हैरान कर रहा है, जहां दो परिवारों को करीब चार दशक बाद पता चला कि जिन बच्चों को उन्होंने अपना समझकर पाला, वे जन्म के समय ही आपस में बदल गए थे। एक सामान्य DNA टेस्ट ने 38 साल पुराने इस रहस्य को उजागर कर दिया और परिवारों की पूरी जिंदगी की कहानी बदल गई। इस खुलासे के बाद दोनों परिवारों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
मामला सिर्फ बच्चों की अदला-बदली तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े भावनात्मक नुकसान, खोए हुए रिश्तों और बीते वर्षों की भरपाई को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह घटना जन्म के समय होने वाली लापरवाही और उसकी दूरगामी असर पर बड़ी चर्चा का कारण बन गई है।
एक DNA रिपोर्ट से सामने आया दशकों पुराना सच
काइल बायलिन और जेरेमी मॉरिसन का जन्म 26 जनवरी 1988 को नॉर्थ डकोटा के ग्राफ्टन स्थित यूनिटी मेडिकल सेंटर में हुआ था। दोनों परिवारों का आरोप है कि अस्पताल की गलती के कारण नवजात बच्चों की अदला-बदली हो गई और दोनों बच्चे गलत परिवारों के साथ घर चले गए। यह मामला तब सामने आया जब काइल को क्रिसमस पर मिले होम DNA टेस्ट के नतीजों ने उसे एक ऐसे रिश्तेदार से जोड़ दिया, जो उसके परिवार से अलग था। आगे की जांच में पता चला कि वह और जेरेमी एक-दूसरे के जैविक परिवारों में पले-बढ़े थे।
'मैं अपने परिवार में अलग क्यों दिखता था?'
जेरेमी मॉरिसन, जो अब कोलोराडो में रहते हैं, लंबे समय से खुद को अपने परिवार से अलग महसूस करते थे। उनका कहना था कि परिवार में कोई भी उनके जैसा नहीं दिखता था। जहां बाकी सभी के बाल भूरे थे, वहीं वह सुनहरे बालों वाले बच्चे थे। DNA जांच के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनकी यह अलग पहचान किसी संयोग की वजह से नहीं, बल्कि जन्म के समय हुई कथित गलती का नतीजा थी।
माता-पिता बोले- खोए हुए साल वापस नहीं आ सकते
इस खुलासे का असर सिर्फ दोनों बेटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके माता-पिता भी भावनात्मक रूप से प्रभावित हुए।
काइल को अपना बेटा मानकर पालने वाली एवलिन न्यूटन ने कहा कि उनका रिश्ता आज भी पहले जैसा ही है, लेकिन उन्हें इस बात का दुख है कि वह अपने जैविक बेटे के साथ बिताए जाने वाले कई अनमोल साल खो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि काइल हमेशा उनका बेटा रहेगा, लेकिन बीते हुए वर्षों को दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता।
जैविक परिवारों से मिलना रहा भावुक अनुभव
सच्चाई सामने आने के बाद दोनों युवकों ने अपने असली माता-पिता से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि मुलाकातें बेहद भावुक थीं, लेकिन परिस्थितियां असामान्य होने के कारण कुछ अजीब भी महसूस हुईं।
अस्पताल ने आरोपों से किया इनकार
दोनों परिवारों ने यूनिटी मेडिकल सेंटर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। हालांकि अस्पताल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अदालत से केस रद्द करने की मांग की है। अस्पताल का कहना है कि उस समय के रिकॉर्ड अब उपलब्ध नहीं हैं और डिलीवरी टीम के कोई भी सदस्य वर्तमान में वहां काम नहीं करते। हालांकि, अस्पताल ने यह भी माना कि इस घटना ने परिवारों पर गहरा भावनात्मक असर डाला है।
DNA टेक्नोलॉजी ने खोला 38 साल पुराना रहस्य
यह मामला दिखाता है कि आधुनिक DNA टेस्ट किस तरह वर्षों पुराने पारिवारिक रहस्यों को उजागर कर सकते हैं। लेकिन इस खुलासे ने उन परिवारों के सामने भावनाओं, रिश्तों और खोए हुए समय से जुड़े कई मुश्किल सवाल भी खड़े कर दिए हैं।