मुंबई के एक स्टार्टअप फाउंडर का कर्मचारियों को लेकर अपनाया गया अलग नजरिया इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रहा है। आमतौर पर खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई, चेतावनी या नौकरी का दबाव देखने को मिलता है, लेकिन ब्लू लॉब्स्टर मीडिया के फाउंडर ध्रुव मुखर्जी ने इससे अलग फैसला लिया। उन्होंने गलती करने वाली कर्मचारी को सजा देने के बजाय उसे खुद को सुधारने और दोबारा बेहतर प्रदर्शन करने का मौका दिया। उनके इस कदम ने वर्क कल्चर, लीडरशिप और कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। कई लोगों ने इसे सकारात्मक नेतृत्व का उदाहरण बताया, जबकि कुछ ने इसे बिजनेस के नजरिए से भी परखा। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि क्या सहानुभूति और भरोसा किसी कर्मचारी के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं?
काम में गिरावट आई तो फाउंडर ने की खुलकर बात
ध्रुव मुखर्जी ने लिंक्डइन पर बताया कि पिछले महीने उन्हें कंपनी के कंटेंट ऑपरेशंस में कई परेशानियां नजर आने लगी थीं। अप्रूवल में देरी, एडिटिंग में ज्यादा समय लगना और क्वालिटी चेक में कमी जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही थीं। उन्होंने कंटेंट ऑपरेशंस लीड आर्या फड़नीस से बातचीत करते हुए कहा था कि शायद वह इस भूमिका के लिए अभी तैयार नहीं हैं। हालांकि, आगे की बातचीत में सामने आया कि समस्या सिर्फ काम से जुड़ी नहीं थी, बल्कि आर्या निजी परेशानियों से भी जूझ रही थीं।
कर्मचारी ने मांगी सैलरी कट की सजा
आर्या ने बताया कि लगातार गलतियों से वह खुद परेशान हो चुकी थीं। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कंपनी से सैलरी में कटौती तक करने का सुझाव दिया था। लेकिन फाउंडर ध्रुव ने ऐसा करने के बजाय उन्हें तीन दिन के लिए पुणे में पेड ब्रेक लेने का ऑफर दिया। इस दौरान दो दिन काम पर फोकस करने और एक दिन आराम व निजी समय बिताने की योजना बनाई गई।
'वर्क कल्चर में इंसान को पहले देखना चाहिए'
ध्रुव ने उनके लिए घर के पास एक को-वर्किंग स्पेस की व्यवस्था भी कराई ताकि उन्हें बेहतर माहौल मिल सके। उनका कहना है कि हर कर्मचारी सिर्फ एक पद या परफॉर्मेंस नंबर नहीं होता, बल्कि उसके पीछे एक इंसान भी होता है। उन्होंने कहा कि बड़े संगठनों में हर बार ऐसा करना संभव नहीं हो सकता, लेकिन जहां भरोसा और मेहनत दिखती है, वहां कर्मचारियों को दूसरा मौका देना जरूरी है।
वायरल पोस्ट ने बढ़ाई कंपनी की लोकप्रियता
ध्रुव की यह कहानी लिंक्डइन पर तेजी से वायरल हो गई। कई लोगों ने उनके फैसले की तारीफ की और इसे सकारात्मक वर्क कल्चर का उदाहरण बताया। उन्होंने बताया कि पोस्ट के बाद कई नौकरी चाहने वालों ने कंपनी से संपर्क किया और इसी पोस्ट के जरिए कंपनी ने एक कर्मचारी को हायर भी किया।
आर्या बोलीं- भरोसे ने बढ़ाया जुड़ाव
आर्या ने कहा कि मुश्किल समय में मिले इस समर्थन ने उन्हें कंपनी के प्रति और ज्यादा जिम्मेदार बना दिया। उनके मुताबिक, जब किसी कर्मचारी को सिर्फ उसकी गलतियों से नहीं बल्कि उसकी परिस्थितियों को समझकर देखा जाता है, तो उसका आत्मविश्वास वापस लौटता है।
फाउंडर की सीख- 'टेबल के दूसरी तरफ भी एक इंसान बैठा है'
ध्रुव मुखर्जी के लिए यह घटना सिर्फ एक कर्मचारी को संभालने की कहानी नहीं, बल्कि नेतृत्व की सोच को दिखाती है। उनका मानना है कि अच्छे लीडर सिर्फ काम नहीं देखते, बल्कि उस व्यक्ति को भी समझते हैं जो वह काम कर रहा है।