'अगर बोर्ड एग्जाम जिंदगी तय करते तो 50% CEO बेरोजगार होते', HCL Tech के पूर्व CEO ने यूं बढ़ाया छात्रों का हौसला

जो लोग अभी अपने पेपर की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें नायर ने एक स्थिर सोच अपनाने और पैनिक से बचने के लिए हिम्मत दी। नायर के मुताबिक, बोर्ड्स, गेम का एक लेवल हैं। पूरा गेम नहीं। जिंदगी एक एग्जाम से बड़ी है। छात्रों का काम तैयारी करना और स्थिर रहना है

अपडेटेड Feb 15, 2026 पर 7:13 PM
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अपना नजरिया समझाने के लिए नायर ने 1979 में CBSE के स्टूडेंट के तौर पर अपना एक अनुभव भी शेयर किया।

हर साल बोर्ड एग्जाम पूरे भारत में घरों में टेंशन का माहौल लाते हैं। बच्चे की पढ़ाई पर फोकस बढ़ जाता है, रूटीन बदल जाते हैं। बच्चे की पढ़ाई में किसी भी तरह का खलल न पड़े, एग्जाम में नंबर अच्छे से अच्छे आएं, हर परिवार की यही कोशिश और दुआ रहती है। लेकिन किसी की मार्कशीट के नंबर उसके करियर और भविष्य की गारंटी नहीं होते हैं। ऐसा ही कुछ समझाया है HCL टेक्नोलोजिज के पूर्व CEO विनीत नायर ने।

नायर ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के बोर्ड एग्जाम्स से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर की है। इस पोस्ट में उन्होंने इस पुरानी सोच पर सवाल उठाया है कि सिर्फ स्कूल के रिजल्ट ही लंबे समय की सफलता तय करते हैं। उन्होंने लिखा, “अगर बोर्ड एग्जाम जिंदगी तय करते, तो आधे CEO बेरोजगार होते। इस बात को समझें।”

नायर ने साफ किया कि वे कड़ी मेहनत या फॉर्मल असेसमेंट की वैल्यू को कम नहीं आंक रहे हैं। शुरू से ही बैलेंस होना चाहिए। उन्होंने कहा, “बोर्ड जरूरी हैं। लेकिन वे आपकी किस्मत नहीं हैं।”


शेयर किया अपने बोर्ड एग्जाम्स का अनुभव

अपना नजरिया समझाने के लिए नायर ने 1979 में CBSE के स्टूडेंट के तौर पर अपने समय के बारे में सोचा। उन्होंने एक ऐसे पल के बारे में बताया जब एक खास पेपर के बाद एंजायटी लगभग हावी हो गई थी। उन्होंने उस बातचीत के बारे में बताया, जिसने उनकी सोच बदल दी। नायर ने लिखा है, “17 साल की उम्र में, मैं केमिस्ट्री के एग्जाम से यह जानते हुए निकला कि मैंने गड़बड़ कर दी है। पूरी तरह से पैनिक मोड में। एक कजिन ने मुझे देखा और पूछा, ‘अगर तुम फेल हो गए तो क्या तुम मर जाओगे?’ मैंने कहा नहीं। फिर उसने कहा, ‘तो फिर तुम इसे जिंदगी और मौत की सिचुएशन क्यों मान रहे हो?’ उस सवाल ने सब कुछ बदल दिया।”

नायर के मुताबिक, उस छोटी सी बातचीत ने उन्हें खुद पर कंट्रोल पाने और अपने अगले एग्जाम को अलग तरह से देखने में मदद की। उन्होंने बताया, “दो दिन बाद, मेरा मैथ्स (गणित) का एग्जाम था। मैंने शांति से पढ़ाई की। स्थिर होकर गया। उसमें सफल रहा।”

उस अनुभव से सीख लेते हुए, उन्होंने एकेडमिक टेस्ट और असल दुनिया की चुनौतियों के बीच का अंतर बताया। उन्होंने लिखा, “सच तो यह है: एग्जाम याददाश्त का टेस्ट लेते हैं। जिंदगी हिम्मत का टेस्ट लेती है। बोर्ड्स, गेम का एक लेवल हैं। पूरा गेम नहीं। इसलिए सो जाओ। खूब पढ़ाई करो। अपना बेस्ट दो। फिर रिजल्ट को स्वीकार करो।”

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'जिंदगी एक एग्जाम से बड़ी है'

जो लोग अभी अपने पेपर की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें नायर ने एक स्थिर सोच अपनाने और पैनिक से बचने के लिए हिम्मत दी। उन्होंने स्टूडेंट्स को सलाह दी कि वे खुद को याद दिलाएं कि एक एग्जाम उनका पूरा भविष्य तय नहीं करता, “जिंदगी एक एग्जाम से बड़ी है। आइने में देखें और कहें: ‘जिंदगी या मौत नहीं। बेस्ट शॉट। कोई डर नहीं।’ और कभी-कभी चिल्लाएं: ‘डैड, ऑमलेट प्लीज… और मैंगो शेक मत भूलना!’ पेरेंट्स को खाना बनाने और चिंता करने दें। आपका काम तैयारी करना और स्थिर रहना है। इसे पढ़ने वाले हर स्टूडेंट के लिए: बोर्ड एग्जाम बुली डर पर जिंदा रहता है। इसे भूखा रखो! तुम यह कर सकते हो, मेरे दोस्त!”

नायर की इस पोस्ट को ऑनलाइन बहुत सपोर्ट मिला है। एक पेरेंट ने रिप्लाई किया, “बिल्कुल सच। बहुत पसंद आया। अपनी बेटी को भी दिखाया।” एक और यूजर ने जिंदगी में एग्जाम के बड़े मतलब पर बात करते हुए कहा, “यह मैसेज मैंने कुछ बच्चों को दिया और आपकी पोस्ट को टैग किया, दोस्तों: स्ट्रेस मत लो...जिंदगी लंबी है और कई एग्जाम होते हैं...फॉर्मल और इनफॉर्मल...मैं अभी भी एग्जाम दे रहा हूं, भले ही वे इनफॉर्मल हों...और एग्जाम धरती पर मेरी आखिरी सांस तक रहेंगे।”

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