Video: 20 घंटे काम, पढ़ाई का दबाव और खर्चों की चिंता… विदेश में छात्रों की जिंदगी का सच आया सामने

विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए वहां की जिंदगी हमेशा आसान नहीं होती। यूरोप में रहने वाले राहुल महाजन ने एक वीडियो में बताया कि कई छात्र पढ़ाई, पार्ट टाइम नौकरी और खर्चों के दबाव से जूझते हैं। उनके अनुभव ने विदेश जाने वाले छात्रों की चुनौतियों को फिर चर्चा में ला दिया है

अपडेटेड Jul 22, 2026 पर 11:38 AM
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विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा करने के लिए कई छात्र एजुकेशन लोन लेते हैं।

विदेश में पढ़ाई करना आज कई भारतीय छात्रों का सपना बन चुका है। बेहतर करियर, नई संभावनाओं और अच्छी जीवनशैली की उम्मीद में हजारों छात्र हर साल दूसरे देशों का रुख करते हैं। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी हमेशा आसान नहीं होती। यूरोप में रह रहे भारतीय शख्स राहुल महाजन ने एक वीडियो में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की उन परेशानियों को सामने रखा, जिनका सामना उन्हें पढ़ाई के साथ करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई छात्र भारी खर्च और कर्ज लेकर विदेश जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद पढ़ाई, पार्ट टाइम नौकरी और रोजमर्रा के खर्चों के बीच फंस जाते हैं।

सीमित काम के घंटे, आर्थिक दबाव और भविष्य की चिंता कई छात्रों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। राहुल की बातों ने विदेश जाकर पढ़ाई करने के सपने और उसकी वास्तविकता के बीच के अंतर पर नई चर्चा छेड़ दी है।

विदेश में शुरू होती है संघर्ष की दौड़


राहुल महाजन ने कहा कि कई छात्र भारत में अच्छी जिंदगी छोड़कर विदेश जाते हैं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। बड़ी फीस खर्च करने के बाद भी उन्हें पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम नौकरी करनी पड़ती है।

उनका कहना है कि कई बार छात्रों को ऐसे काम भी करने पड़ते हैं, जिन्हें उन्होंने भारत में कभी करने की कल्पना नहीं की थी।

20 घंटे काम की सीमा और बढ़ता खर्च

महाजन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए काम करने के घंटे सीमित होते हैं, जिससे कमाई करना आसान नहीं होता। पढ़ाई के साथ सीमित समय में नौकरी करना, किराया, खाने और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना काफी मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने बताया कि कई छात्र अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए हर तरह का काम करने को मजबूर हो जाते हैं।

एजुकेशन लोन का बोझ बढ़ाता है दबाव

विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा करने के लिए कई छात्र एजुकेशन लोन लेते हैं। लेकिन विदेश पहुंचने के बाद पढ़ाई और नौकरी के साथ-साथ लोन चुकाने की चिंता भी लगातार बनी रहती है। महाजन ने कहा कि छात्रों पर आर्थिक दबाव के अलावा परिवार और समाज की उम्मीदों का भी बोझ रहता है। कई लोगों को बार-बार यह सवाल झेलना पड़ता है कि वे कब वापस आएंगे।

NRI बनने का सपना और हकीकत के बीच फंसे छात्र

राहुल महाजन ने बताया कि विदेश में बसने की प्रक्रिया, पढ़ाई पूरी करना और भविष्य की योजनाएं बनाना भी छात्रों के लिए आसान नहीं होता। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस वीडियो के बाद कई लोगों ने विदेशी शिक्षा और वहां की जिंदगी की वास्तविक चुनौतियों पर चर्चा शुरू कर दी है।

यह वीडियो उन छात्रों के लिए एक सोचने का मौका है, जो विदेश जाने का फैसला केवल चमक-दमक देखकर लेते हैं, लेकिन वहां की वास्तविक चुनौतियों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

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