बच्चे को पढ़ाना है या पैसा बहाना? इंटरनेशनल स्कूल की ₹37 लाख की फीस ने उड़ाए होश

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वायरल पोस्ट ने स्कूल फीस को लेकर बहस छेड़ दी है। चेन्नई की एक पैरेंट ने इंटरनेशनल स्कूल की फीस साझा की, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए और महंगी शिक्षा पर सवाल उठने लगे हैं

अपडेटेड Apr 11, 2026 पर 11:15 AM
Story continues below Advertisement
37 लाख देकर क्या मिलता है? इंटरनेशनल स्कूल पर उठे बड़े सवाल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हाल ही में एक वायरल पोस्ट ने देशभर में स्कूल फीस को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। चेन्नई की एक पैरेंट द्वारा शेयर किए गए अनुभव ने लोगों का ध्यान खासतौर पर इंटरनेशनल स्कूलों की बढ़ती फीस की ओर खींचा है। उन्होंने बताया कि फीस स्ट्रक्चर देखकर उन्हें काफी हैरानी हुई, जिसके बाद ये मुद्दा तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया। इस पोस्ट के सामने आने के बाद कई लोग अपनी-अपनी राय रखने लगे हैं।

कुछ इसे शिक्षा की बढ़ती लागत से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे अमीर और आम लोगों के बीच बढ़ती दूरी का उदाहरण मान रहे हैं। कुल मिलाकर, इस एक पोस्ट ने शिक्षा व्यवस्था और उसकी पहुंच को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

लाखों में फीस, सुनकर लोग हैरान


पोस्ट के मुताबिक, Chennai के एक अमेरिकन इंटरनेशनल स्कूल में गैर-भारतीय छात्रों की सालाना फीस 40,000 डॉलर यानी करीब 37-38 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। इतनी बड़ी रकम सुनकर सोशल मीडिया पर लोग हैरान रह गए और चर्चा तेज हो गई।

फीस को लेकर उठे सवाल

इस खुलासे के बाद कई यूजर्स ने कहा कि प्राइवेट और इंटरनेशनल स्कूलों की फीस पर कोई सख्त नियम नहीं है। लोगों का मानना है कि शिक्षा की लागत इतनी ज्यादा नहीं होनी चाहिए और इसमें पारदर्शिता जरूरी है।

महंगी फीस के पीछे क्या वजह?

कुछ लोगों ने ये भी बताया कि ऐसे स्कूल खासतौर पर विदेशी परिवारों के लिए होते हैं। यहां विदेशी टीचर्स को अच्छी सैलरी, ट्रैवल और अन्य सुविधाएं दी जाती हैं, जिससे खर्च बढ़ जाता है।

पढ़ाई या स्टेटस सिंबल?

कई यूजर्स का कहना है कि इतनी ज्यादा फीस सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि एक तरह का स्टेटस भी बन गई है। ये स्कूल अमीर परिवारों तक ही सीमित रहते हैं, जिससे आम लोगों के लिए दूरी बन जाती है।

हर किसी के लिए जरूरी नहीं मुद्दा

वहीं कुछ लोगों ने कहा कि ये मुद्दा सभी के लिए उतना बड़ा नहीं है, क्योंकि इन स्कूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर बच्चे विदेशी होते हैं और उनकी फीस कंपनियां ही देती हैं।

क्या सच में खुद को जानवर मानने लगे हैं लोग? ‘थेरियन’ ट्रेंड का चौंकाने वाला सच

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।