आज की तेज़ रफ्तार और बदलती जीवनशैली में अक्सर देखा जाता है कि शादी के बाद पत्नी के अधिकार और उसकी प्राइवेसी की अनदेखी होती है। कई बार उसे केवल घर की देखभाल तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि वह भी एक स्वतंत्र और सम्मानित इंसान है। इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, हर पत्नी को न सिर्फ सुरक्षा और सम्मान, बल्कि अपनी व्यक्तिगत आजादी का पूरा हक है। मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि ससुराल में पत्नी की गरिमा की रक्षा करना सिर्फ एक कर्तव्य नहीं, बल्कि ये इस्लाम की मूल सीखों का हिस्सा है। पत्नी का आदर करना, उसकी प्राइवेसी का सम्मान करना और उसे मानसिक व भावनात्मक सुरक्षा देना परिवार की खुशहाली के लिए भी जरूरी है।
