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पत्नी पर ससुराल का दबाव? जानिए इस्लाम में उनके अधिकार की पूरी जानकारी

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अक्सर शादी के बाद पत्नी के अधिकार और प्राइवेसी की अनदेखी होती है। इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, हर पत्नी को सुरक्षा, सम्मान और निजी आज़ादी का पूरा हक है। ससुराल में उसकी गरिमा और अधिकारों की रक्षा करना परिवार की खुशहाली और प्रेमपूर्ण वातावरण के लिए बेहद जरूरी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 03, 2026 पर 10:57 AM
पत्नी पर ससुराल का दबाव? जानिए इस्लाम में उनके अधिकार की पूरी जानकारी
ससुराल में पत्नी के अधिकारों और सम्मान की अहमियत, जानें इस्लाम की सीख

आज की तेज़ रफ्तार और बदलती जीवनशैली में अक्सर देखा जाता है कि शादी के बाद पत्नी के अधिकार और उसकी प्राइवेसी की अनदेखी होती है। कई बार उसे केवल घर की देखभाल तक सीमित कर दिया जाता है, जबकि वह भी एक स्वतंत्र और सम्मानित इंसान है। इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार, हर पत्नी को न सिर्फ सुरक्षा और सम्मान, बल्कि अपनी व्यक्तिगत आजादी का पूरा हक है। मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि ससुराल में पत्नी की गरिमा की रक्षा करना सिर्फ एक कर्तव्य नहीं, बल्कि ये इस्लाम की मूल सीखों का हिस्सा है। पत्नी का आदर करना, उसकी प्राइवेसी का सम्मान करना और उसे मानसिक व भावनात्मक सुरक्षा देना परिवार की खुशहाली के लिए भी जरूरी है।

पत्नी को सम्मान और सुरक्षा देना अनिवार्य

मौलाना इफराहीम हुसैन बताते हैं कि पत्नी का दर्जा केवल परिवार की सेविका के रूप में नहीं, बल्कि समान सम्मान प्राप्त करने वाली व्यक्ति के रूप में होना चाहिए। ससुराल में उसे सुरक्षा, सम्मान और आदर देना प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी है। पत्नी पर ये पाबंदी नहीं कि वो घर के अन्य सदस्यों की सेवा या अन्य काम करे। उसकी भूमिका केवल काम करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके अधिकारों का सम्मान करना हर रिश्तेदार का कर्तव्य है।

पत्नी के बुनियादी अधिकार

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