यहां लड़कियों के पहने हुए जूतों की हो रही नीलामी, लोग दे रहे हजारों रुपये

जापान में इन दिनों लड़कियों के इस्तेमाल किए हुए स्कूल जूतों की ऑनलाइन बिक्री ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि कुछ पुराने और घिसे हुए जूते 50 हजार येन तक में खरीदे जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस ट्रेंड को अजीब मानसिकता और गलत सोच से जोड़कर तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं

अपडेटेड May 09, 2026 पर 3:55 PM
इस ट्रेंड को लेकर इंटरनेट पर तीखी बहस शुरू हो गई है।

जापान में इन दिनों एक अनोखा लेकिन विवादों में घिरा ट्रेंड लोगों का ध्यान खींच रहा है। स्कूलों में लड़कियों द्वारा पहने जाने वाले पुराने इंडोर जूतों की ऑनलाइन बिक्री को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर बहस हो रही है। कुछ लोग इसे सामान्य पुरानी चीजों की बिक्री मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे बेहद अजीब और चिंताजनक मानसिकता से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल, जापान में स्कूलों के अंदर अलग इंडोर जूते पहनने की परंपरा है, जिन्हें “उवाबाकी” कहा जाता है। हाल के दिनों में इन इस्तेमाल किए गए जूतों की ऑनलाइन डिमांड अचानक बढ़ गई, जिससे विवाद और भी गहरा गया।

सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर पुराने और घिसे जूतों के लिए इतनी दिलचस्पी क्यों दिखाई जा रही है। यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ ऑनलाइन बिक्री नहीं, बल्कि सामाजिक सोच पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

क्या होते हैं ‘उवाबाकी’ जूते?


जापान में घर, स्कूल और कई सार्वजनिक जगहों के अंदर बाहर वाले जूते पहनकर जाना सही नहीं माना जाता। वहां साफ-सफाई और सम्मान को काफी महत्व दिया जाता है।

इसी वजह से स्कूलों में छात्र-छात्राएं अलग इंडोर जूते पहनते हैं, जिन्हें “उवाबाकी” कहा जाता है। ये जूते आमतौर पर सफेद रंग के होते हैं और देखने में बैले डांस शूज जैसे लगते हैं।

स्कूल से लेकर कॉलेज तक होता है इस्तेमाल

जापान में किंडरगार्टन से लेकर कॉलेज तक के छात्र स्कूल में प्रवेश करते समय अपने बाहरी जूते बदलकर ये इंडोर शूज पहनते हैं। कई छात्र अपने जूतों पर नाम, क्लास या छोटे डिजाइन भी बना लेते हैं ताकि वे आसानी से पहचाने जा सकें।

हर साल ग्रेजुएशन या पढ़ाई खत्म होने के दौरान छात्र पुराने सामान बेचते हैं और इसी दौरान ये जूते भी ऑनलाइन सेल में दिखाई देते हैं।

जब पुराने और घिसे जूतों ने खींचा ध्यान

हाल ही में कुछ ऐसे जूतों की ऑनलाइन बिक्री सामने आई, जो काफी पुराने, गंदे और घिसे हुए थे। यही बात लोगों को हैरान कर गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइटामा प्रांत से भेजे जा रहे एक जोड़ी जूतों की कीमत करीब 6,900 येन यानी लगभग 44 डॉलर रखी गई थी। जूतों के विवरण में लिखा गया था कि उन्हें तीन साल तक इस्तेमाल किया गया और उन पर लिखे नाम के निशान अब भी मौजूद हैं।

पुराने जूतों की कीमत पहुंची हजारों में

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ पुराने स्कूल जूतों की ऑनलाइन नीलामी 50,000 येन यानी लगभग 320 डॉलर तक पहुंच गई।

सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि खरीदार खास तौर पर ऐसे जूते पसंद कर रहे थे, जिन पर लड़कियों के नाम साफ दिखाई दे रहे हों और जो ज्यादा इस्तेमाल किए हुए लग रहे हों।

सोशल मीडिया पर क्यों मचा बवाल?

इस ट्रेंड को लेकर इंटरनेट पर तीखी बहस शुरू हो गई है। कई लोगों का कहना है कि यह सिर्फ “पुराने जूते बेचने” का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे गलत मानसिकता छिपी हुई है।

कुछ यूजर्स ने इसे युवा लड़कियों को ऑब्जेक्ट की तरह देखने वाली सोच से जोड़कर देखा है। यही वजह है कि जापान में यह मुद्दा अब सामाजिक बहस का हिस्सा बन चुका है।

यादों का सामान या विवाद की वजह?

कुछ लोग इन जूतों को “ग्रेजुएशन मेमोरी” यानी स्कूल की यादों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कई लोग इसे बेहद अजीब और असहज ट्रेंड बता रहे हैं।

फिलहाल सोशल मीडिया पर यह मुद्दा तेजी से चर्चा में बना हुआ है और लोग लगातार इस पर अपनी राय दे रहे हैं।

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