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जींस में छोटी पॉकेट क्यों होती है? 150 साल पुरानी है वजह... जानकर रह जाएंगे हैरान

साल 1873 में लेवी स्ट्रॉस और दर्जी जैकब डेविस ने दुनिया की पहली मजबूत डेनिम वर्क पैंट का पेटेंट कराया। उस समय इसे "वेस्ट ओवरऑल" कहा जाता था। यह पैंट खास तौर पर खदानों में काम करने वाले मजदूरों, काउबॉय, बढ़ई और रेलवे कर्मचारियों के लिए बनाई गई थी। उस दौर में लोग कलाई पर घड़ी नहीं पहनते थे। ज्यादातर लोग समय देखने के लिए चेन वाली जेब घड़ी (पॉकेट वॉच) का इस्तेमाल करते थे

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Jul 27, 2026 पर 8:37 PM
जींस में छोटी पॉकेट क्यों होती है? 150 साल पुरानी है वजह... जानकर रह जाएंगे हैरान
लगभग हर जींस की सामने वाली दाईं जेब के अंदर एक छोटी जेब भी होती है।

लगभग हर नीली जींस की सामने वाली दाईं जेब के अंदर एक छोटी जेब भी होती है। आजकल लोग इसमें सिक्के, चाबियां या वायरलेस ईयरबड जैसी छोटी चीजें रखते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसे इन सामानों के लिए नहीं बनाया गया था। दरअसल, 19वीं सदी के आखिर में यह छोटी जेब खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाई गई थी, जो काम के दौरान पॉकेट वॉच (जेब में रखने वाली घड़ी) इस्तेमाल करते थे। इस जेब का मकसद घड़ी को सुरक्षित रखना था, ताकि काम करते समय वह टूटे या खराब न हो।

1873 में शुरू हुई थी छोटी जेब की कहानी

साल 1873 में लेवी स्ट्रॉस और दर्जी जैकब डेविस ने दुनिया की पहली मजबूत डेनिम वर्क पैंट का पेटेंट कराया। उस समय इसे "वेस्ट ओवरऑल" कहा जाता था। यह पैंट खास तौर पर खदानों में काम करने वाले मजदूरों, काउबॉय, बढ़ई और रेलवे कर्मचारियों के लिए बनाई गई थी। उस दौर में लोग कलाई पर घड़ी नहीं पहनते थे। ज्यादातर लोग समय देखने के लिए चेन वाली जेब घड़ी (पॉकेट वॉच) का इस्तेमाल करते थे। काम के दौरान अगर इस घड़ी को सामान्य जेब में रखा जाता, तो औजारों, कीलों और पत्थरों से टकराकर उसका शीशा टूट सकता था या उस पर खरोंच आ सकती थी। इसी समस्या को देखते हुए जींस में एक छोटी अलग जेब बनाई गई, ताकि पॉकेट वॉच सुरक्षित रहे और काम करते समय उसे कोई नुकसान न पहुंचे।

पॉकेट वॉच को सुरक्षित रखने के लिए बनाई गई थी यह छोटी जेब

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