कर्नाटक के एक स्कूल की वायरल मार्कशीट ने इंटरनेट पर ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। जहां छोटे-छोटे बच्चों के शानदार नंबर देखकर कुछ लोग उनकी मेहनत की तारीफ कर रहे हैं, तो वहीं कई लोग इसे बचपन पर बढ़ते पढ़ाई के दबाव से जोड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पहली-दूसरी क्लास से ही बच्चों को रैंक और परफेक्ट नंबर की दौड़ में शामिल कर देना सही है? कई यूजर्स का मानना है कि आज बच्चों का बचपन किताबों और मार्क्स के बीच कहीं खोता जा रहा है।
