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Langda mango: नाम सुनते ही सब हंसते हैं, लेकिन ‘लंगड़ा आम’ की कहानी सुनकर चौंक जाएंगे!

Langda aam: करीब 300 साल पहले बनारस के एक साधु ने अपने आश्रम में इस अनोखे आम को लगाया था। खासियत ये कि पकने के बाद भी इसका रंग बदलता नहीं, हरा ही रहता है। इस आम से जुड़ी कहानी इतनी दिलचस्प और फिल्मी है कि जिसने भी सुनी, वो इसे भूला नहीं पाया

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 22, 2025 पर 11:01 AM
Langda mango: नाम सुनते ही सब हंसते हैं, लेकिन ‘लंगड़ा आम’ की कहानी सुनकर चौंक जाएंगे!
langda aam: गर्मी के मौसम में जब सहारनपुर के बाग लंगड़ा आम से लद जाते हैं

यूपी के सहारनपुर की मिट्टी में ऐसी मिठास घुली है कि यहां के बागों से उठती आम की खुशबू दूर-दूर तक पहचान बन गई है। खास बात ये है कि सहारनपुर को लोग सिर्फ आम के बागों की वजह से नहीं जानते, बल्कि यहां के “लंगड़ा आम” ने तो इस इलाके को दुनिया के नक्शे पर एक अलग ही पहचान दी है। कहते हैं जिसने एक बार लंगड़ा चखा, वो बाकी आमों का स्वाद भूल जाता है। पकने के बाद भी हरे रंग में रहने वाला यह आम अपनी अनोखी खुशबू और रसीले स्वाद से दिल जीत लेता है।

गर्मी के मौसम में जब सहारनपुर के बाग लंगड़ा आम से लद जाते हैं, तो दूर-दूर से लोग इसे लेने आते हैं। हर साल टनों आम यहां से देश-दुनिया में पहुंचते हैं। यूं ही नहीं इसे आमों का राजा कहा जाता, इसके पीछे है स्वाद का वो जादू जो हर जुबान पर बस जाता है!

बनारस से शुरू हुई कहानी

कहानी करीब 250-300 साल पुरानी है। वाराणसी के एक शिव मंदिर में एक पुजारी रहते थे, जो चलने-फिरने में कमजोर थे। लोग उन्हें प्यार से “लंगड़ा पुजारी” कहकर बुलाते थे। उसी पुजारी ने अपने आश्रम में एक आम का पेड़ लगाया था।

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