23 मई को जब सूरज मेघालय की धुंध भरी पहाड़ियों के पीछे डूब रहा था, तब उमा रघुवंशी ने एक ऐसा फोन कॉल किया, जो उन्हें जीवन भर एक डर का एहसास दिलाता रहेग। उनके नवविवाहित बेटे राजा और उनकी पत्नी सोनम शिलांग में हनीमून पर थे और उमा को बस ये जानना था कि दोनों बच्चे कैसे हैं। यह ग्यारस का दिन था, एक पवित्र उपवास का दिन और पूजा पाठ करने वाली सास को लग रहा था कि सोनम पैदल ट्रेकिंग करने के दौरान कुछ खा लेगी।
