Chandra Grahan 2026: होलिका दहन पर 3 मार्च को चांद को लगेगा ग्रहण, 3 घंटे से ज्यादा लंबा होगा भारत में दिखने वाले चंद्र ग्रहण का समय

Chandra Grahan 2026: इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होलिका दहन के दिन लगेगा। यह ग्रहण 3 घंटे से ज्यादा लंबा होगा और भारत में नजर आएगा। इसलिए इसका सूतक काल भी माना जाएगा। आइए जानें देश के किस हिस्से में देखने को मिलेगा इस ग्रहण का नजारा

अपडेटेड Jan 10, 2026 पर 11:00 PM
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इस दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा है और इसी दिन होलिका दहन किया जाता है।

Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, लेकिन यह धार्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका महत्व तब और बढ़ जाता है, जब ये किसी खास दिन या पर्व के दिन होता है। जैसे साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होगा। इस दिन फाल्गुन मास की पूर्णिमा है और इसी दिन होलिका दहन किया जाता है। ग्रहण काल में पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान नहीं किया जाता है। साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी माना जाएगा और होलिका दहन भी इससे अछूता नहीं रहेगा। चंद्र ग्रहण की अवधि करीब 3 घंटे 27 मिनट रहेगी। यह चंद्र ग्रहण पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में होगा। आइए जानें इस साल का पहला चंद्र ग्रहण कब होगा, इसका सूतक काल और इस अवधि में धार्मिक रूप से क्या करें और क्या नहीं

भारत में कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण का नजारा

साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को बंगाल के उत्तरी पूर्वी क्षेत्र के साथ-साथ पूर्वोत्तर के मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश में दिखाई देगा।

चंद्र ग्रहण का समय

भारतीय समयानुसार, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण दोपहर 03 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा। इसका समापन शाम 06 बजकर 47 मिनट पर होगा। इस ग्रहण की अवधि 3 घंटे 27 मिनट रहेगी।

ग्रहण का सूतक काल


चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले सुबह 06 बजकर 20 पर शुरू हो जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के साथ 06 बजकर 47 मिनट पर सूतक काल भी समाप्त हो जाएगा। होलिका दहन का कार्य इसके बाद ही किया जा सकेगा। ग्रहण जिन स्थानों पर दिखाई देता है, वहीं सूतक काल मान्य होता है। जहां पर ये दिखाई नहीं देता है, वहां सूतक का धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाता है।

चन्द्र ग्रहण का समय

  • उपच्छाया से पहला स्पर्श दोपहर 02 बजकर 16 मिनट पर
  • प्रच्छाया से पहला स्पर्श दोपहर 03 बजकर 21 मिनट पर
  • खग्रास प्रारम्भ शाम 04 बजकर 35 मिनट पर
  • परमग्रास चन्द्र ग्रहण शाम 05 बजकर 04 मिनट पर
  • खग्रास समाप्त शाम 05 बजकर 33 मिनट पर
  • प्रच्छाया से अन्तिम स्पर्श शाम 06 बजकर 46 मिनट
  • उपच्छाया से अन्तिम स्पर्श शाम 07 बजकर 52 मिनट
  • खग्रास की अवधि 57 मिनट 27 सेकण्ड
  • खण्डग्रास की अवधि – 03 घण्टे 25 मिनट 17 सेकण्ड
  • उपच्छाया की अवधि – 05 घण्टे 35 मिनट 45 सेकण्ड

सूतक काल में ये न करें

  • सूतक काल में पूजा-पाठ और हवन नहीं करना चाहिए।
  • सूतक काल में मंदिर में प्रवेश वर्जित माना जाता है।
  • सूतक काल में भगवान की मूर्ति को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
  • सूतक काल में भोजन पकाना और खाना नहीं चाहिए।
  • सूतक काल में शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।

चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें?

  • ग्रहण काल में ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
  • ग्रहण काल में ॐ चन्द्राय नमः मंत्र का जप करें।
  • ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
  • ग्रहण काल में गायत्री मंत्र का जप करें।
  • ग्रहण काल में ईश्वर का स्मरण करें।
  • ग्रहण काल में भजन-कीर्तन सुन सकते हैं।
  • ग्रहण काल में सकारात्मक विचार रखें।
  • ग्रहण काल में भोजन में तुलसी का पत्ता रखें।

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